- संयुक्त आयोजन: यूपी चैस स्पोर्ट्स एसोसिएशन और लखनऊ चैस एसोसिएशन द्वारा 3 दिवसीय सेमिनार आयोजित।
- मुख्य विशेषज्ञ: इंटरनेशनल मास्टर (IM) विशाल सरीन और इंटरनेशनल मास्टर (IM) दिनेश शर्मा ने दिया प्रशिक्षण।
- ट्रेनिंग का फोकस: FIDE मानकों के अनुरूप बच्चों की ट्रेनिंग, क्षमता निर्माण और निर्णय लेने के कौशल का विकास।
- लक्ष्य: देश भर में शतरंज प्रशिक्षकों की क्षमता को निखारना और ट्रेनिंग के स्तर को वैश्विक बनाना।
विश्व शतरंज महासंघ (FIDE) एवं अखिल भारतीय शतरंज महासंघ (AICF) के तत्वावधान में तीन दिवसीय फिडे प्रशिक्षक सेमिनार का भव्य शुभारंभ लखनऊ के स्थानीय अम्बर होटल में हुआ। इस कार्यक्रम का आयोजन यूपी चैस स्पोर्ट्स एसोसिएशन एवं लखनऊ चैस एसोसिएशन द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।

सेमिनार के पहले ही दिन देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों को शतरंज प्रशिक्षण की आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक पद्धतियों एवं व्यावहारिक पहलुओं की गहन जानकारी दी गई।
IM विशाल सरीन और IM दिनेश शर्मा ने दिए ट्रेनिंग टिप्स
सेमिनार के प्रथम दिन इंटरनेशनल मास्टर विशाल सरीन और इंटरनेशनल मास्टर दिनेश शर्मा ने मुख्य वक्ता और ट्रेनर के रूप में सत्र को संबोधित किया। दोनों दिग्गजों ने शतरंज सिखाने के दौरान प्रशिक्षकों के सामने आने वाली सामान्य और विशिष्ट चुनौतियों का व्यावहारिक विश्लेषण किया तथा उनके प्रभावी समाधानों पर चर्चा की।

विशेषज्ञों ने मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया:
- बच्चों की ट्रेनिंग: छोटे खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति को समझते हुए प्रशिक्षण की सही पद्धति अपनाना।
- निर्णय क्षमता का विकास: खिलाड़ियों की क्षमता के अनुरूप अभ्यास कराना और बोर्ड पर त्वरित निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण: पारंपरिक तरीकों के बजाय आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों से कोचिंग देना।
प्रतिभागियों के सवालों का समाधान और प्रैक्टिकल सेशन
सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने कोचिंग और खिलाड़ियों की समस्याओं से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका IM विशाल सरीन और IM दिनेश शर्मा ने व्यावहारिक उदाहरणों के साथ उत्तर दिया। प्रतिभागियों ने इस सत्र को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलेगी।
इस 3 दिवसीय सेमिनार का मुख्य उद्देश्य देश भर के शतरंज प्रशिक्षकों की कोचिंग स्किल्स को अपग्रेड करना है, जिससे भारत में शतरंज के बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण के स्तर को अंतरराष्ट्रीय ऊंचाई पर ले जाया जा सके।