बिहार के 15 वर्षीय क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में ही भारतीय क्रिकेट में अपनी खास पहचान बना ली है। अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) उनकी प्रतिभा को सिर्फ मौजूदा प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखना चाहता। बोर्ड ने वैभव और उनकी उम्र के दूसरे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए लंबी अवधि की योजना पर काम शुरू कर दिया है।
मुंबई में हुई बीसीसीआई की समीक्षा बैठक के बाद बोर्ड सचिव देवजीत सैकिया ने वैभव सूर्यवंशी को लेकर बोर्ड की सोच स्पष्ट की। उन्होंने संकेत दिया कि बीसीसीआई का मकसद युवा क्रिकेटर को जल्द से जल्द ज्यादा से ज्यादा क्रिकेट खिलाना नहीं, बल्कि उन्हें लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के लिए तैयार करना है।
‘वन-सीरीज वंडर’ नहीं बनाना चाहता BCCI
वैभव ने बेहद कम उम्र में जिस तरह अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित किया है, उसने उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित युवा खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है। लेकिन बीसीसीआई अब उनके करियर को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना चाहता है।
देवजीत सैकिया के मुताबिक बोर्ड चाहता है कि वैभव जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी सिर्फ कुछ सीरीज तक सीमित न रहें, बल्कि सचिन तेंदुलकर और दूसरे महान खिलाड़ियों की तरह देश के लिए लंबे समय तक खेलें।
यानी बीसीसीआई का फोकस तत्काल सफलता से ज्यादा करियर मैनेजमेंट, सही मौके और लंबी अवधि के विकास पर है।
वैभव अकेले नहीं, 10-15 युवा खिलाड़ियों पर नजर
बीसीसीआई की रणनीति सिर्फ वैभव सूर्यवंशी तक सीमित नहीं है। बोर्ड ने करीब 10 से 15 ऐसे युवा खिलाड़ियों का एक समूह तैयार किया है, जिन्हें भविष्य के स्टार के तौर पर विकसित करने पर काम किया जा रहा है।
इन खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और विकास में बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की अहम भूमिका होगी। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण की देखरेख में इन खिलाड़ियों के स्किल डेवलपमेंट, फिटनेस और क्रिकेटिंग ग्रोथ पर नजर रखी जा रही है।
इसका मतलब साफ है—बीसीसीआई अब कम उम्र में सामने आने वाली प्रतिभाओं को सिर्फ घरेलू क्रिकेट या एक-दो अंतरराष्ट्रीय सीरीज के प्रदर्शन के आधार पर नहीं देखना चाहता, बल्कि उनके पूरे करियर का रोडमैप तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
दलीप ट्रॉफी में खेलेंगे वैभव या नहीं?
वैभव सूर्यवंशी के सामने अब तुरंत एक अहम फैसला भी है। 6 सितंबर से दलीप ट्रॉफी का फाइनल खेला जाना है, जिसमें ईस्ट जोन की टीम पहुंच चुकी है।
वहीं 13 सितंबर से भारत और अफगानिस्तान के बीच टी20 सीरीज शुरू होनी है और वैभव भारतीय टीम का हिस्सा हैं।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि वैभव दलीप ट्रॉफी के फाइनल में ईस्ट जोन के लिए खेलेंगे या सीधे भारतीय टीम की तैयारी पर ध्यान देंगे।
इसका फैसला टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर की सलाह और टीम मैनेजमेंट की जरूरत के मुताबिक किया जाएगा।
BCCI के सामने असली चुनौती क्या है?
वैभव की उम्र इस पूरे मामले को खास बनाती है। इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने वाले खिलाड़ी पर अचानक मीडिया, फैंस और प्रदर्शन का दबाव बढ़ जाता है।
ऐसे में बीसीसीआई की कोशिश सिर्फ वैभव की बल्लेबाजी को निखारने की नहीं, बल्कि उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से लंबे करियर के लिए तैयार करने की भी है।
सचिन तेंदुलकर का उदाहरण इसी सोच को दिखाता है—कम उम्र में बड़ी पहचान मिलने के बाद भी करियर को वर्षों तक लगातार ऊंचे स्तर पर बनाए रखना।
वैभव सूर्यवंशी के मामले में अब BCCI की सबसे बड़ी परीक्षा यही होगी कि इस युवा प्रतिभा को जल्दबाजी में इस्तेमाल करने के बजाय सही तरीके से तैयार किया जाए।
अगर बोर्ड की यह रणनीति काम करती है, तो वैभव सिर्फ भारतीय क्रिकेट का आज का युवा सितारा नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों का बड़ा नाम बन सकते हैं।