सेहत

बार-बार सिरदर्द को न करें नजरअंदाज! ये हो सकते हैं ब्रेन ट्यूमर के शुरुआती संकेत, समय पर पहचान बचा सकती है जान

नई दिल्ली: सिरदर्द एक आम समस्या है और अक्सर लोग इसे थकान, तनाव, नींद की कमी या लंबे समय तक मोबाइल-लैपटॉप इस्तेमाल करने का परिणाम मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर सिरदर्द लगातार बना रहे, समय के साथ बढ़ता जाए या इसके साथ कुछ असामान्य लक्षण भी दिखाई दें, तो यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे मामलों में ब्रेन ट्यूमर की संभावना को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

क्या होता है ब्रेन ट्यूमर?

ब्रेन ट्यूमर तब विकसित होता है जब मस्तिष्क की कुछ कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं। यह ट्यूमर कैंसरयुक्त या गैर-कैंसरयुक्त दोनों प्रकार का हो सकता है। हालांकि दोनों ही स्थितियों में यह दिमाग के सामान्य कार्यों को प्रभावित कर सकता है और कई तरह की शारीरिक तथा मानसिक समस्याएं पैदा कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बीमारी की समय रहते पहचान हो जाए तो इलाज के सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

भारत में कितने मामले आते हैं?

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत में हर साल ब्रेन ट्यूमर के 28 हजार से अधिक नए मामले सामने आते हैं। वहीं इस बीमारी के कारण 24 हजार से ज्यादा लोगों की मौत होने का अनुमान है।

अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में भी ब्रेन और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़े ट्यूमर के मामलों में लगातार वृद्धि की बात सामने आई है, जिससे जागरूकता और समय पर जांच की जरूरत और बढ़ जाती है।

ब्रेन ट्यूमर के शुरुआती संकेत क्या हैं?

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण हर मरीज में अलग-अलग हो सकते हैं। हालांकि कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें गंभीरता से लेने की जरूरत होती है।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

लगातार या बार-बार सिरदर्द होना, खासकर सुबह के समय दर्द का अधिक महसूस होना।

अचानक दौरे पड़ना या पहले कभी न हुए दौरे का शुरू होना।

धुंधला दिखाई देना, डबल विजन की समस्या या आंखों की रोशनी में बदलाव महसूस होना।

सुनने की क्षमता में कमी आना या कानों से जुड़ी नई समस्याएं शुरू होना।

बार-बार चक्कर आना, संतुलन बनाए रखने में कठिनाई या चलते समय लड़खड़ाहट महसूस होना।

लगातार मतली और उल्टी की शिकायत रहना।

शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, सुन्नपन या हाथ-पैरों पर नियंत्रण कम होना।

बोलने में परेशानी होना, शब्द भूल जाना या बातचीत के दौरान भ्रम की स्थिति बनना।

याददाश्त कमजोर पड़ना, ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होना और सोचने-समझने की क्षमता में बदलाव आना।

व्यवहार में अचानक परिवर्तन, चिड़चिड़ापन बढ़ना या बार-बार मूड बदलना भी इसके संकेत हो सकते हैं।

कैसे की जाती है जांच?

यदि डॉक्टर को ब्रेन ट्यूमर की आशंका होती है तो मरीज को एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी जांच कराने की सलाह दी जाती है। इन जांचों के जरिए मस्तिष्क की स्पष्ट तस्वीर प्राप्त होती है और ट्यूमर की स्थिति का पता चलता है।

कुछ मामलों में ट्यूमर की प्रकृति जानने के लिए बायोप्सी भी कराई जाती है, जिससे यह निर्धारित किया जा सके कि ट्यूमर कैंसरयुक्त है या नहीं।

क्या है इलाज के विकल्प?

ब्रेन ट्यूमर का उपचार उसके प्रकार, आकार और स्थान पर निर्भर करता है। सर्जरी, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी सबसे सामान्य उपचार विकल्प माने जाते हैं।

इसके अलावा चिकित्सा विज्ञान में हुई प्रगति के कारण अब टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जो कई मरीजों के लिए प्रभावी साबित हो रही हैं।

समय पर पहचान क्यों है जरूरी?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेन ट्यूमर अपेक्षाकृत दुर्लभ बीमारी जरूर है, लेकिन इसके लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। यदि लंबे समय से सिरदर्द, बार-बार चक्कर आना, याददाश्त में कमी या अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं महसूस हो रही हैं, तो बिना देरी किए चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

 

vineet verma

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