नई दिल्ली। मानसून सत्र 2026 की शुरुआत के साथ ही संसद में NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर पैदा हुआ गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार चार दिनों के हंगामे, नारेबाजी और बार-बार स्थगन के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही 27 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी गई है। मानसून सत्र के पहले पांच दिनों में न तो कोई बिल पास हो सका और न ही कोई विधायी कामकाज। 28 लंबित विधेयकों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 27 जुलाई को संसद पटरी पर लौटेगी या यह राजनीतिक गतिरोध और गहराएगा?
20 जुलाई 2026 को सत्र शुरू होने के साथ ही विपक्षी दलों ने NEET मामले को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया। पांच दिनों में सदन का माहौल कुछ इस प्रकार रहा:
इस पूरे विवाद में अब तीन मुख्य कोण उभरकर सामने आए हैं:
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कर दिया है कि तीन मांगों पर कोई समझौता नहीं होगा:
24 जुलाई को कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में सरकार के साथ बैठक के बाद CJP ने अपना ‘हर जिले, एक दिन, एक मांग’ आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। CJP की मांगें हैं:
CJP का बयान: CJP ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित फास्ट-ट्रैक कोर्ट के फैसले को ‘बैंड-एड’ (सतही इलाज) करार देते हुए खारिज कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 27 जुलाई को सदन दोबारा शुरू होने पर तीन स्थितियाँ बन सकती हैं:
NEET-UG का मुद्दा अब केवल एक प्रवेश परीक्षा तक सीमित नहीं रहा है। यह भारत की संपूर्ण परीक्षा प्रणाली की साख, युवाओं के भविष्य और कोचिंग तंत्र (जिस पर सालाना ₹1.32 लाख करोड़ खर्च होते हैं) पर खड़ा हुआ एक बड़ा सवाल बन चुका है। अब देखना यह होगा कि 27 जुलाई को सरकार इस गतिरोध को तोड़ने के लिए क्या नया कदम उठाती है।
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