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देवशयनी एकादशी कल है या परसों? जानिए व्रत की सही तारीख, पूजा विधि, नियम और महत्व

vineet verma
Last updated: July 24, 2026 7:00 am
vineet verma
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नई दिल्ली: आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मनाई जाने वाली देवशयनी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इसे हरिशयनी एकादशी और आषाढ़ी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और चातुर्मास की शुरुआत होती है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि इस वर्ष देवशयनी एकादशी का व्रत 24 जुलाई को रखा जाएगा या 25 जुलाई को। पंचांग के अनुसार, उदयातिथि के आधार पर वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई, शनिवार को रखा जाएगा।

Contents
देवशयनी एकादशी से शुरू होगा चातुर्मासऐसे करें देवशयनी एकादशी की पूजाव्रत के दौरान इन नियमों का रखें ध्यानदेवशयनी एकादशी पर क्या करेंइन बातों से करें परहेजक्यों विशेष मानी जाती है देवशयनी एकादशी?

देवशयनी एकादशी से शुरू होगा चातुर्मास

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा, जप, तप और दान का विशेष महत्व माना गया है। कई परंपराओं में इन चार महीनों के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में परंपराओं में कुछ भिन्नता भी देखने को मिलती है।

ऐसे करें देवशयनी एकादशी की पूजा

व्रत वाले दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ, संभव हो तो पीले रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें पीले पुष्प, तुलसी दल, पंचामृत, मौसमी फल और प्रसाद अर्पित करें। घी का दीपक और धूप जलाकर पूजा करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें और अंत में आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

व्रत के दौरान इन नियमों का रखें ध्यान

देवशयनी एकादशी के दिन श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार निर्जला व्रत, फलाहार या एक समय सात्विक भोजन कर सकते हैं। इस दिन चावल, प्याज, लहसुन, मांसाहार और नशीले पदार्थों के सेवन से परहेज किया जाता है। पूजा में तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना गया है। इसके साथ ही झूठ बोलने, क्रोध करने, विवाद करने और किसी की निंदा करने से भी बचने की सलाह दी जाती है।

देवशयनी एकादशी पर क्या करें

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। तुलसी दल और पीले पुष्प अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम या श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करें। जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा का दान दें। पूरे दिन संयमित और शांत व्यवहार बनाए रखें।

इन बातों से करें परहेज

देवशयनी एकादशी के दिन तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें। चावल का सेवन न करें। किसी का अपमान करने या अनावश्यक विवाद में पड़ने से बचें। व्रत का पारण द्वादशी तिथि से पहले नहीं करना चाहिए।

क्यों विशेष मानी जाती है देवशयनी एकादशी?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं। इस अवधि में किए गए जप, तप, दान और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। चातुर्मास की समाप्ति देवउठनी एकादशी पर होती है, जिसके बाद परंपरागत रूप से मांगलिक कार्यों का शुभारंभ माना जाता है।

 

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