Highlights
- वैश्विक तनाव के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आया 17% का तगड़ा उछाल।
- केंद्र सरकार ने डीजल और एटीएफ (ATF) के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स लगभग दोगुना किया।
- पेट्रोल एक्सपोर्टर्स को मिली राहत, निर्यात शुल्क में की गई कटौती; जानें नई दरें।
India Windfall Tax Update: कच्चे तेल की आग में तप रहा बाजार, सरकार ने लिया बड़ा एक्शन
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध की स्थिति ने वैश्विक ईंधन बाजार में खलबली मचा दी है। इस भू-राजनीतिक संकट (Geopolitical Crisis) की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक भारी तेजी आई है। कच्चे तेल के दाम आसमान छूने के बाद केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF यानी हवाई ईंधन) के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) में भारी बढ़ोतरी कर दी है।
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन के मुताबिक, टैक्स की ये नई दरें गुरुवार (16 जुलाई) से देश भर में प्रभावी हो गई हैं।
डीजल और हवाई ईंधन पर टैक्स लगभग दोगुना, पेट्रोल पर मिली राहत
सरकार ने घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और तेल कंपनियों के अप्रत्याशित मुनाफे पर लगाम लगाने के लिए टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव किया है:
- डीजल एक्सपोर्ट (Diesel Export): डीजल के निर्यात पर लगने वाले चार्ज को 8.5 रुपये प्रति लीटर से सीधे बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
- ATF एक्सपोर्ट (ATF Export): हवाई ईंधन पर विंडफॉल टैक्स को 7.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर किया गया है।
- पेट्रोल पर राहत (Petrol Export): दूसरी तरफ, पेट्रोल निर्यातकों के लिए अच्छी खबर है। पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी को 4 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
क्यों बढ़े कच्चे तेल के दाम? स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बढ़ा खतरा
जुलाई महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उलटफेर देखने को मिला है। अप्रैल, मई और जून में लगातार आई गिरावट के बाद, जुलाई में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें करीब 17 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं।
हालिया सत्र में ब्रेंट क्रूड 2 फीसदी की छलांग लगाकर 84.73 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। तेल बाजार के विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद ईंधन की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। विशेष रूप से ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) वाले समुद्री मार्ग पर खतरा बढ़ने के कारण दुनिया भर में फ्यूल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है, जिससे आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं।
तेल कंपनियों के मुनाफे पर सरकार की पैनी नजर
भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग कंपनियों के मार्जिन की हर 15 दिनों में समीक्षा करती है। इससे पहले 1 जुलाई को जब ग्लोबल मार्केट में नरमी थी, तब सरकारी तेल कंपनियों ने एटीएफ के दाम करीब 5 रुपये प्रति लीटर घटाए थे। लेकिन अब युद्ध के हालातों को देखते हुए सरकार को विंडफॉल टैक्स में यह आक्रामक बढ़ोतरी करनी पड़ी है।