Highlights
- मॉनसून सत्र से पहले एनडीए (NDA) दो-तिहाई बहुमत (Two-Thirds Majority) के जादुई आंकड़े के बेहद करीब।
- टीएमसी (TMC) और शिवसेना (UBT) में बड़ी बगावत, कई सांसदों ने बदला पाला।
- लोकसभा और राज्यसभा का पूरा गणित बदला; अब आसानी से पास होंगे संविधान संशोधन बिल।
नई दिल्ली। संसद के आगामी मॉनसून सत्र (Monsoon Session) से पहले देश की राजनीति में एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। विपक्ष के दो प्रमुख दलों—तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (UBT)—में हुई बड़ी टूट के बाद सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) गठबंधन संसद के दोनों सदनों में धीरे-धीरे दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचता दिख रहा है।
अगर एनडीए इस जादुई आंकड़े को छू लेती है, तो सरकार के लिए संसद में किसी भी बड़े संविधान संशोधन बिल (Constitution Amendment Bill) को पास कराना बेहद आसान हो जाएगा। याद दिला दें कि पिछले सत्र में इसी दो-तिहाई बहुमत की कमी के कारण महिला आरक्षण बिल (Women’s Reservation Bill) अटक गया था, लेकिन इस बार कहानी पूरी तरह बदल चुकी है।
Lok Sabha Number Game: 360 के जादुई आंकड़े से महज 6 कदम दूर NDA
लोकसभा में इस समय कुल मौजूदा सदस्यों की संख्या 540 है (3 सीटें खाली हैं)। इस लिहाज से संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 होता है। आइए समझते हैं कि एनडीए का ग्राफ अचानक कैसे बढ़ा:
- TMC में महा-बगावत: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा की बंपर जीत के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए। ममता बनर्जी की टीएमसी के 28 में से 20 सांसदों ने पाला बदल लिया और एक नई पार्टी NCPI में विलय कर लिया। ये सभी अब एनडीए के साथ हैं।
- शिवसेना और एनसीपी का रुख: उद्धव ठाकरे गुट (UBT) के 6 सांसदों ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना से हाथ मिला लिया है। वहीं, शरद पवार गुट (NCP) के 8 सांसदों ने भी शर्तों पर सरकार को समर्थन देने के संकेत दिए हैं।
- DMK का बड़ा झटका: तमिलनाडु चुनावों के बाद डीएमके (DMK) ने कांग्रेस से अपना नाता तोड़ लिया है, और माना जा रहा है कि उनके सांसद भी बिल पर सरकार का साथ दे सकते हैं।
नया समीकरण: इन बागियों और अन्य दलों के 56 सांसदों के समर्थन के बाद लोकसभा में एनडीए का आंकड़ा 354 तक पहुंच गया है। अब सरकार की नजर जगन मोहन रेड्डी की YSRCP के 4 सांसदों और 7 निर्दलीय सांसदों पर है। विपक्ष की संभावित अनुपस्थिति (Absenteeism) भी एनडीए का काम आसान कर सकती है।
Rajya Sabha Mathematics: ऊपरी सदन में भी विपक्ष पस्त, NDA को चाहिए सिर्फ 11 वोट
संविधान संशोधन के लिए केवल लोकसभा ही नहीं, बल्कि राज्यसभा (Rajya Sabha) में भी दो-तिहाई बहुमत अनिवार्य है।
- राज्यसभा की कुल संख्या: 245
- दो-तिहाई बहुमत का लक्ष्य: 164
- एनडीए की मौजूदा ताकत: 153 (7 मनोनीत और 3 निर्दलीय सांसदों सहित)
यहाँ एनडीए बहुमत के आंकड़े से महज 11 सांसद दूर है। इस कमी को पूरा करने के लिए भाजपा की नजर वाईएसआर कांग्रेस (4), बीआरएस (3), डीएमके (8) और शरद पवार गुट के 1 सांसद पर टिकी है। अगर इन दलों की तरफ से क्रॉस वोटिंग या वॉकआउट होता है, तो एनडीए यहाँ भी बाजी मार लेगी।
मोदी सरकार की रणनीति: क्या मॉनसून सत्र में रचेगा इतिहास?
एनडीए की मॉनसून सत्र को लेकर रणनीति बिल्कुल साफ है। सरकार क्षेत्रीय दलों से सशर्त समर्थन लेने, विपक्षी कुनबे में सेंध लगाने और जरूरत पड़ने पर वोटिंग के दौरान विपक्षी सांसदों को अनुपस्थित रखने की जुगत में है।
यदि यह रणनीतिक चक्रव्यूह सफल रहता है, तो मोदी सरकार इस सत्र में देश के राजनीतिक और संवैधानिक ढांचे को बदलने वाले कई कड़े कानून और संशोधन आसानी से पारित करवा लेगी। अब पूरे देश की नजरें मॉनसून सत्र पर हैं, जहां यह साफ होगा कि नंबर गेम का असली सिकंदर कौन बनता है।