Highlights:
- अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की जांच पूरी, जल्द सौंपी जाएगी फाइनल रिपोर्ट।
- जांच में सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि ट्रस्ट की व्यापक लापरवाही और वित्तीय भ्रष्टाचार के मिले बड़े संकेत।
- मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा और टिन्नू यादव के साथ ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों के कनेक्शन का दावा।
Ram Mandir Donaton Theft Case: सिर्फ चोरी नहीं, महा-घोटाले की ओर घूम रही जांच की सुई!
अयोध्या। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी मामले ने अब एक बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) की तफ्तीश लगभग पूरी हो चुकी है और अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंपने की तैयारी है। लेकिन इस फाइनल रिपोर्ट के आने से पहले ही लखनऊ से लेकर अयोध्या तक हड़कंप मच गया है।
शुरुआत में जो मामला महज कुछ लाख रुपये की नकदी चोरी का लग रहा था, SIT की गहराई से की गई जांच के बाद वह अब चढ़ावा प्रबंधन, वित्तीय अनियमितताओं और बड़े पैमाने पर फैले भ्रष्टाचार के एक बड़े नेटवर्क में तब्दील हो चुका है।
SIT की फाइनल रिपोर्ट में देरी क्यों? हर सबूत को किया जा रहा पुख्ता
सूत्रों के मुताबिक, SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट को शासन के सामने पेश करने से पहले हर कानूनी और तकनीकी पहलू को बारीकी से री-चेक कर रही है। इस जांच के दायरे को पुख्ता करने के लिए टीम ने:
- महीनों के CCTV फुटेज खंगाले हैं।
- मंदिर के वित्तीय रिकॉर्ड और बैंकिंग प्रक्रियाओं का विस्तृत ऑडिट किया है।
- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा तय सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की है।
जांच की आंच में आए नए किरदार: अनुकल्प मिश्रा और टिन्नू यादव का नाम आया सामने
इस मामले में सबसे सनसनीखेज खुलासा यह हुआ है कि चोरी के तार सिर्फ संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर काम करने वाले छोटे कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं हैं।
ट्रस्ट के करीबियों पर शक: SIT की फाइनल रिपोर्ट में इस बात का साफ जिक्र है कि चढ़ावा चोरी मामले के मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा और टिन्नू यादव की राम मंदिर ट्रस्ट के बेहद शक्तिशाली पदाधिकारियों और सदस्यों के साथ काफी घनिष्ठता थी।
जांच में सामने आया है कि इन आरोपियों को सीनियर मैनेजमेंट का वरदहस्त प्राप्त था, जिसके चलते वे लंबे समय से इस गड़बड़ी को अंजाम दे रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, कई वरिष्ठ अधिकारियों को इस बात की भनक या जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद वे जानबूझकर अनजान बने रहे।
सीनियर अधिकारियों पर गिरेगी गाज: लापरवाही का बहाना नहीं चलेगा!
इससे पहले 23 जून को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट में केवल 6 संविदा कर्मियों और 2 सुपरवाइजरों पर कार्रवाई की बात कही गई थी, जिससे बड़े अधिकारी बच निकले थे। लेकिन फाइनल रिपोर्ट में SIT ने कड़ा रुख अपनाया है:
- जिम्मेदारी तय: रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि वरिष्ठ पर्यवेक्षक अधिकारी महज ‘असावधानी’ या ‘मौके पर अनुपस्थिति’ का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकते।
- व्यापक लापरवाही: राम मंदिर ट्रस्ट की फंक्शनिंग और सिक्योरिटी मानकों के बार-बार उल्लंघन को लेकर रिपोर्ट में तीखी टिप्पणियां की गई हैं।
आगे क्या होगा? पुलिस इन्वेस्टीगेशन का बढ़ेगा दायरा
SIT द्वारा शासन को अंतिम रिपोर्ट सौंपते ही अयोध्या पुलिस की कार्रवाई का दायरा बेहद बड़ा होने वाला है। इस रिपोर्ट के आधार पर कई रसूखदार और बड़े चेहरों की गिरफ्तारियां भी संभव हैं। राम भक्तों की आस्था से जुड़े इस मामले पर अब सबकी नजरें टिकी हैं कि सरकार इस रिपोर्ट के आते ही क्या सख्त एक्शन लेती है।