दिल्ली-NCR में दीपावली के दौरान पटाखे जलाने को लेकर जारी असमंजस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सीमित राहत दी है। अदालत के फैसले के मुताबिक, लोग 7 और 8 नवंबर 2026 को सख्त शर्तों के साथ प्रमाणित ग्रीन पटाखे जला सकेंगे। यह अनुमति केवल दो दिनों के लिए दी गई है। इसके बाद 9 नवंबर 2026 से दिल्ली-NCR में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध दोबारा लागू हो जाएगा। इस फैसले का उद्देश्य वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के साथ लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के बीच संतुलन बनाना है।
जस्टिस सुंदरेश और जस्टिस वराले की पीठ का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर को दिए आदेश में दिल्ली-NCR में 7 और 8 नवंबर 2026 को प्रमाणित ग्रीन पटाखों के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल की सीमित अनुमति दी है। आदेश के मुताबिक, पटाखे केवल सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ही जलाए जा सकेंगे।
इसके अलावा अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों, शिक्षण संस्थानों और अधिसूचित शांत क्षेत्रों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। इन नियमों का उद्देश्य त्योहार के दौरान वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना है।
ग्रीन पटाखों के निर्माण और बिक्री के लिए सख्त नियम
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में पटाखों को लेकर सख्त नियम तय किए हैं। आदेश के मुताबिक, केवल CSIR-NEERI से प्रमाणित और PESO द्वारा अनुमोदित ग्रीन पटाखों को ही अनुमति होगी। इनका निर्माण 2 से 6 नवंबर 2026 तक किया जा सकेगा।
हर पैकेट पर निर्माता, पंजीकरण और परीक्षण प्रमाणपत्र की जानकारी के लिए QR कोड अनिवार्य होगा। बिक्री केवल प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थानों पर 4 से 6 नवंबर तक होगी। ऑनलाइन बिक्री पर पूरी तरह रोक रहेगी। बेरियम युक्त, पारंपरिक पटाखों और पटाखों की लड़ियों पर प्रतिबंध जारी रहेगा। नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द करने सहित कार्रवाई हो सकती है।
एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग और 9 नवंबर से पूर्ण प्रतिबंध
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में प्रदूषण की निगरानी के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। CPCB और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को 2 से 30 नवंबर तक वायु गुणवत्ता पर नजर रखने और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। साथ ही, दीपावली के बाद अस्पतालों में प्रदूषण से संबंधित मरीजों की संख्या और संभावित मौतों का आंकड़ा जुटाने का निर्देश दिया गया है।
आदेश के मुताबिक, 9 नवंबर 2026 से पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री, वितरण और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध फिर लागू होगा। संबंधित राज्यों को 14 दिसंबर तक अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी।
क्या होते हैं ग्रीन पटाखे?
ग्रीन पटाखे वे पटाखे होते हैं जिन्हें पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाने के उद्देश्य से तैयार किया जाता है और इनमें हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल कम या प्रतिबंधित होता है।
हालांकि, चूंकि ग्रीन पटाखे भी कुछ हद तक प्रदूषण फैलाते हैं, इसलिए अदालत ने इनके इस्तेमाल पर भी ये कड़े नियम लागू किए हैं। इससे पहले 30 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने पूरे दिन छूट देने के बजाय सीमित समय और श्रेणी तय करने की संभावना पर विचार किया था, जिस पर अमल करते हुए अब यह फैसला सुनाया गया है।