रोशनी और उल्लास के महापर्व दीपावली की पांच दिवसीय चमक के बीच एक ऐसा रहस्य छिपा है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि मुख्य दिवाली से ठीक एक दिन पहले यानी छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी या काली चौदस) के दिन संकटमोचन हनुमान की पूजा क्यों की जाती है? धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसके पीछे भगवान श्रीराम का वह खास वरदान और एक ऐसा रहस्य छिपा है जो घर की हर नकारात्मक ऊर्जा को पलभर में नष्ट कर देता है। आखिर क्या है इसके पीछे का पूरा इतिहास और कैसे की जाती है इस दिन बजरंगबली की विशेष पूजा? आइए जानते हैं इस लेख में हर एक बात विस्तार से।
छोटी दिवाली और हनुमान पूजा की पौराणिक मान्यताएं
दीपावली का पांच दिवसीय दीपोत्सव धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलता है। इसमें कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली का दिन बेहद खास माना जाता है।
श्रीराम का खास वरदान: पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान श्रीराम रावण का वध करके 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद अयोध्या लौटे थे, तब उनके स्वागत में पूरी नगरी को दीपों से सजाया गया था। मान्यता है कि हनुमान जी की अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर श्रीराम ने उन्हें यह वरदान दिया था कि दीवाली से ठीक पहले उनकी पूजा की जाएगी। तभी से छोटी दिवाली पर हनुमान जी की उपासना की परंपरा चली आ रही है।
नकारात्मक शक्तियों से रक्षा: छोटी दिवाली को ‘का काली चौदस’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन नकारात्मक शक्तियों और बुरी ऊर्जाओं का प्रभाव बढ़ने की मान्यता है। ऐसे में संकटमोचन हनुमान की पूजा करने से व्यक्ति को भय, रोग और जीवन की तमाम बाधाओं से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
कुछ जगहों पर हनुमान जन्मोत्सव: देश के कई हिस्सों खास तौर पर गुजरात और अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर—में इस दिन हनुमान जन्मोत्सव भी मनाया जाता है।
राम दरबार से पहले आशीर्वाद: हनुमान जी को भगवान श्रीराम का परम भक्त और द्वारपाल माना जाता है, इसलिए राम दरबार और माता लक्ष्मी की पूजा से पहले उनका स्मरण करने की परंपरा है।
भगवान शिव से क्या है हनुमान जी का खास कनेक्शन?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी को भगवान शिव का 11वां रुद्रावतार माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव ने भगवान विष्णु के राम अवतार की सेवा करने और उनकी भक्ति का आनंद लेने के लिए ही हनुमान जी के रूप में अवतार लिया था। यही वजह है कि हनुमान जी की उपासना को भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त करने का भी एक बेहद प्रभावी माध्यम माना जाता है।
छोटी दिवाली पर कैसे करें हनुमान जी की पूजा? (पूजन विधि)
यदि आप भी इस दिन हनुमान जी की कृपा पाना चाहते हैं, तो इन आसान चरणों में पूजा कर सकते हैं:
1. स्नान और शुद्धि: छोटी दिवाली की सुबह तिल के तेल से शरीर की मालिश करके स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
2. प्रतिमा की स्थापना: शुभ मुहूर्त में हनुमान जी की बाल रूप या वीर मुद्रा वाली प्रतिमा को एक साफ चौकी पर स्थापित करें।
3. पूजा सामग्री अर्पण: हनुमान जी की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें लाल वस्त्र, जनेऊ, लाल चंदन, केसर, सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें।
4. भोग लगाएं: बजरंगबली को पान, पूआ या लड्डू का भोग लगाएं। इसके बाद धूप-दीप जलाकर उनकी विधि-विधान से आरती करें।
5. मंत्र और पाठ: पूजा के दौरान पूरी श्रद्धा के साथ हनुमान चालीसा का पाठ करें और ‘ॐ श्री हनुमते नमः’ मंत्र का जाप करें।
छोटी दिवाली पर हनुमान जी की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि बजरंगबली का स्मरण करने और हनुमान चालीसा का पाठ करने से साहस, सकारात्मकता और मन की शांति मिलती है। हालांकि, छोटी दिवाली पर हनुमान पूजा की परंपरा को भगवान श्रीराम के किसी विशेष वरदान से जोड़ने वाली कथा का स्पष्ट प्रामाणिक स्रोत उपलब्ध नहीं है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई समस्त जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिषीय और धार्मिक विश्वासों पर आधारित है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या पूजा-पद्धति को अपनाने से पहले अपने नजदीकी पुरोहित या धर्मगुरु की सलाह अवश्य लें।