नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री गतिविधियों पर बढ़ते जोखिम के बीच भारत के सामने सबसे बड़ी चिंता अपने समुद्री कर्मियों और व्यापारी जहाजों पर काम कर रहे नागरिकों की सुरक्षा को लेकर है। अमेरिका की बदलती रणनीति और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के बीच भारत ने कूटनीतिक और समुद्री स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है ताकि भारतीय नाविक किसी भी संघर्ष का शिकार न बनें।
समंदर में भारतीय नाविकों की सुरक्षा क्यों बनी बड़ी चिंता
खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव का सीधा असर भारतीय समुद्री कर्मियों पर पड़ने का खतरा बढ़ गया है। हाल के घटनाक्रमों के बाद भारत ने स्थिति पर लगातार निगरानी तेज कर दी है।
अमेरिकी प्रतिनिधि को तलब कर भारत ने जताई चिंता
मामले की गंभीरता को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी दूतावास के वरिष्ठ प्रतिनिधि को बुलाकर समुद्री सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता दर्ज कराई। यह कदम उस रिपोर्ट के बाद उठाया गया जिसमें ओमान तट के पास भारतीय चालक दल वाले एक व्यापारी जहाज पर हमले की जानकारी सामने आई थी।
भारत ने साफ संदेश दिया कि किसी भी सैन्य कार्रवाई के दौरान नागरिक जहाजों और उन पर काम कर रहे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
दुनिया के समुद्री नेटवर्क में भारत की बड़ी मौजूदगी
वैश्विक समुद्री क्षेत्र में भारतीय नाविकों की बड़ी हिस्सेदारी है। हजारों भारतीय कार्गो जहाजों, तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों पर तैनात रहते हैं। इनमें से बड़ी संख्या नियमित रूप से खाड़ी और अरब सागर के अहम समुद्री मार्गों से होकर गुजरती है।
यही वजह है कि क्षेत्र में बढ़ता तनाव भारत के लिए केवल विदेश नीति का विषय नहीं बल्कि नागरिक सुरक्षा का भी बड़ा मुद्दा बन गया है।
हमलों के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
हाल में व्यापारी जहाजों पर हुए कथित हमलों के बाद समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ घटनाओं में भारतीय समुद्री कर्मियों पर भी असर पड़ा, जिसके बाद सुरक्षित समुद्री संचालन को लेकर मांग तेज हुई।
भारत किस समाधान पर दे रहा जोर
भारत ऐसे समुद्री सुरक्षा ढांचे की वकालत कर रहा है जिसमें सैन्य बलों और व्यापारिक जहाजों के बीच बेहतर समन्वय हो। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी सैन्य तनाव के दौरान अंतरराष्ट्रीय चालक दल वाले नागरिक जहाज गलती से निशाना न बनें।
भारत की कोशिश सिर्फ अपने नागरिकों को निकालने तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने पर भी केंद्रित है।