Highlights
- केंद्र की हरी झंडी: आरबीआई को ₹10 और ₹20 के पॉलीमर (प्लास्टिक) नोटों के फील्ड ट्रायल की मिली औपचारिक मंजूरी।
- क्लाइमेट टेस्टिंग: राजस्थान की गर्मी से लेकर हिमाचल की ठंड और तटीय इलाकों की नमी में परखी जाएगी नोटों की मजबूती।
- नहीं बंद होंगे कागजी नोट: प्लास्टिक नोट आने के बावजूद मौजूदा कागजी करेंसी पूरी तरह लीगल टेंडर बनी रहेगी।
नई दिल्ली । देश में कटे-फटे और जल्दी खराब होने वाले करेंसी नोटों की समस्या से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बड़ा प्रयोग करने जा रहा है। केंद्र सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पॉलीमर (प्लास्टिक) करेंसी नोट लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। पूरे देश में लागू करने से पहले आरबीआई अलग-अलग भौगोलिक और मौसम के मिज़ाज वाले शहरों में इसका फील्ड ट्रायल (Pilot Project) शुरू करेगा।
संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत ₹10 के 100 करोड़ और ₹20 के 100 करोड़—यानी कुल 200 करोड़ पॉलीमर नोट बाजार में उतारे जाएंगे।
5 अलग-अलग मौसम वाले इलाकों में होगी टेस्टिंग
आरबीआई पायलट प्रोजेक्ट के लिए शहरों का चयन किसी रैंडम तरीके से नहीं करता। इसके लिए देश के अलग-अलग पर्यावरणीय और जलवायु क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले शहरों को चुना जाता है।
इससे पहले हुए ट्रायल्स के आधार पर जयपुर (शुष्क व गर्म), शिमला (अत्यधिक ठंडा), भुवनेश्वर (तटीय व नम), मैसूर (मध्यम जलवायु) और कोच्चि (भारी बारिश व उमस) जैसे शहरों को मॉडल के तौर पर देखा जाता रहा है।
आरबीआई का मुख्य उद्देश्य: अत्यधिक तापमान, पसीना, भारी बारिश, धूल, रगड़ और आम जनता द्वारा बार-बार मुड़ने/इस्तेमाल होने पर प्लास्टिक नोट की उम्र और मजबूती को जांचना है।
सिर्फ ₹10 और ₹20 के नोट ही क्यों चुने गए?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आरबीआई हर साल लगभग 2,000 से 2,400 करोड़ जर्जर व खराब हो चुके नोटों को नष्ट करता है। इनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी ₹10 और ₹20 के छोटे नोटों की होती है, क्योंकि दैनिक लेन-देन में इनका इस्तेमाल सबसे ज्यादा और तेजी से होता है।
- लंबी उम्र: पॉलीमर नोट पारंपरिक कॉटन-बेस्ड कागजी नोटों की तुलना में 2.5 से 4 गुना अधिक समय तक चलते हैं।
- मुद्रण एजेंसी: इन विशेष नोटों की छपाई ‘भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड’ (BRBNMPL) द्वारा की जाएगी।
क्या बंद हो जाएंगे पुराने कागजी नोट?
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि पॉलीमर नोट आने से मौजूदा कागजी करेंसी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कागज और प्लास्टिक दोनों तरह के नोट कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य (Legal Tender) रहेंगे और बाजार में एक साथ चलन में रहेंगे।
पॉलीमर नोटों के फायदे और भविष्य की चुनौतियाँ
हालांकि पॉलीमर नोट टिकाऊ होते हैं और इन्हें आसानी से फाड़ा नहीं जा सकता, लेकिन इसके साथ कुछ तकनीकी और आर्थिक चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं:
- लागत में बढ़ोतरी: इनकी शुरुआती छपाई का खर्च कागजी नोटों से 30% से 60% तक अधिक आ सकता है।
- मशीनों का री-कैलिब्रेशन: बैंकों की कैश सॉर्टिंग मशीनों और वेंडिंग मशीनों को नए नोटों के साइज और मटेरियल के हिसाब से री-कैलिब्रेट करना होगा।
- पर्यावरणीय रिसाइकलिंग: कागजी नोट बायोडिग्रेडेबल होते हैं, जबकि पॉलीमर नोटों की मियाद खत्म होने के बाद उन्हें खास इंडस्ट्रियल रिसाइकलिंग प्रक्रिया से गुजारना पड़ेगा।