मुंबई: महाराष्ट्र के भिवंडी में चार मंजिला कोहिनूर बिल्डिंग के एक हिस्से के ढहने से हुए दर्दनाक हादसे में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है। बालाजी नगर इलाके में गुरुवार रात करीब 11:20 बजे हुए इस हादसे के बाद बचकर निकले लोगों ने उस भयावह मंजर को याद करते हुए बताया कि इमारत से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा था। सीढ़ियां मलबे में दब चुकी थीं, इसलिए कई लोगों को जान बचाने के लिए खिड़कियों से छलांग लगानी पड़ी।
‘पहले से था खतरे का अंदेशा, सामान समेट ही रहे थे कि भरभराकर ढह गई इमारत’
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कोहिनूर इमारत के कई निवासियों को पहले से ही किसी बड़े हादसे की आशंका थी। कुछ परिवार घर खाली करने की तैयारी कर रहे थे, जबकि कई लोग सामान पैक कर रहे थे। इसी दौरान अचानक चार मंजिला इमारत का एक हिस्सा भरभराकर ढह गया और पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
‘सब कुछ हिलने लगा, फिर अचानक छा गया अंधेरा’
हादसे में घायल संगीता प्रजापति ने बताया कि बच्चों को खाना खिलाने के बाद वह सोने की तैयारी कर रही थीं, तभी तेज चीख-पुकार सुनाई दी। इससे पहले कि वह बाहर निकल पातीं, पूरी इमारत हिलने लगी। उन्होंने बताया कि मरम्मत का काम चल रहा था और उसी दौरान तेज कंपन महसूस हुआ। बाहर भागते ही चारों ओर अंधेरा छा गया और वह बेहोश हो गईं। बाद में उनके पति और पड़ोसियों ने उन्हें सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया। उनके पति और चारों बच्चे सुरक्षित हैं, जबकि उनके हाथ में मामूली चोट आई है।
सीढ़ियां बंद मिलीं तो पहली मंजिल की खिड़की से लगा दी छलांग
हादसे में घायल दीपक यादव और उनके मामा अभय यादव ने बताया कि उनका परिवार उसी रात इमारत छोड़ने का फैसला कर चुका था। खाना खाने के बाद जब वे सामान समेट रहे थे, तभी जोरदार धमाका हुआ और इमारत का दूसरा हिस्सा ढह गया। दोनों ने पहले सीढ़ियों से निकलने की कोशिश की, लेकिन वहां मलबा जमा होने से रास्ता पूरी तरह बंद था। इसके बाद उन्होंने पहली मंजिल की खिड़की से छलांग लगाकर अपनी जान बचाई। इस दौरान दोनों के पैरों में चोटें आईं।
‘मां की चीखें सुनाई देती रहीं, चारों तरफ धूल और धुआं था’
इमारत के नीचे स्थित चॉल में रहने वाले पीयूष जायसवाल ने बताया कि रात करीब 11:20 बजे तेज धमाके की आवाज सुनते ही पूरे इलाके में भगदड़ मच गई। उन्होंने कहा कि भागते समय उन्हें अपनी मां की चीखें सुनाई देती रहीं। चारों तरफ धूल और धुएं का गुबार था, जिससे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। सौभाग्य से उनकी मां सुरक्षित मिल गईं और दोनों समय रहते बाहर निकल आए।
‘डिनर के बाद निकलने वाले थे, उससे पहले ही ढह गई बिल्डिंग’
इमारत के दूसरे हिस्से की चौथी मंजिल पर रहने वाले मजदूर कृष्णा निसाद ने बताया कि भवन में पहले से धंसाव के संकेत दिखाई दे रहे थे और इसी वजह से मरम्मत का काम चल रहा था। परिवार ने रात का खाना खाने के बाद इमारत छोड़ने की योजना बनाई थी, लेकिन बाहर निकलने से पहले ही बिल्डिंग का हिस्सा ढह गया। उन्होंने कहा कि किस्मत से उनका परिवार सुरक्षित बच गया।
प्रशासन ने पहले ही घोषित किया था खतरनाक भवन
नगर निकाय अधिकारियों ने कोहिनूर इमारत को पहले ही खतरनाक श्रेणी में रखा था और परिसर में मरम्मत का काम चल रहा था। हादसे के बाद इमारत के बचे हुए हिस्से को भी खाली करा दिया गया है और वहां रहने वाले सभी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया है।