आइची-नागोया (जापान)। जब इरादे फौलादी हों तो बड़ी से बड़ी मुसीबत भी घुटने टेक देती है। एशियन गेम्स 2026 के मेंस डबल स्कल्स (Rowing) इवेंट में भारतीय रोअर्स सतनाम सिंह और सलमान खान की जोड़ी ने इतिहास रचते हुए ब्रॉन्ज़ मेडल (Bronze Medal) अपने नाम कर लिया है।
इस इवेंट में भारत का यह पहला मेडल है। फाइनल रेस में भारतीय जोड़ी ने 6:13.25 का समय निकालकर तीसरा स्थान हासिल किया। इस रेस में चीन ने गोल्ड और उज्बेकिस्तान ने सिल्वर मेडल जीता। लेकिन इस ऐतिहासिक जीत से भी ज्यादा खास है भारतीय रोअर सलमान खान की संघर्ष से भरी लाइफ स्टोरी।
18 की उम्र में पिता का साया उठा, परिवार चलाने के लिए चलाई Uber कैब
उत्तर प्रदेश के अमेठी से आने वाले सलमान खान चार भाइयों और दो बहनों में सबसे बड़े हैं। उनके पिता मोहम्मद कासिम खान का निधन डेंगू के कारण हो गया था। पिता के जाने के बाद 18 साल के सलमान पर छोटे भाई-बहनों और परिवार की जिम्मेदारी आ गई।
सलमान हमेशा से भारतीय सेना (Indian Army) में शामिल होना चाहते थे, लेकिन घरेलू हालात बिगड़ने की वजह से उन्हें अपना सपना बीच में ही छोड़ना पड़ा। परिवार का पेट पालने के लिए वह दिल्ली चले गए और वहां दिन-रात Uber कैब चलाने लगे।
कैब छोड़ी, 4 महीने की कड़ी मेहनत और आर्मी में सिलेक्शन
कैब चलाने के दौरान भी सलमान के दिल में देश सेवा का जुनून कम नहीं हुआ था। उन्होंने एक बार फिर अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया। कैब दूसरे ड्राइवर को सौंपकर सलमान ने 4 महीने तक दिन-रात आर्मी भर्ती की तैयारी की।
उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने फिजिकल व रिटन एग्जाम पास कर लिया। 25 सितंबर 2018 को सलमान पुणे में ‘बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप’ (Bombay Engineer Group) का हिस्सा बने।
सेना में आने के बाद पहली बार देखा रोइंग (Rowing) खेल
आर्मी जॉइन करने से पहले सलमान ने कभी रोइंग (नौकायन) खेल के बारे में सुना भी नहीं था। लेकिन सेना में उनके कोच सत्यवान, सतीश सिरात और प्रभात मिश्रा ने सलमान की बेहतरीन शारीरिक क्षमता (Physical Capacity) को पहचाना और उन्हें इस खेल में उतरने के लिए प्रेरित किया।
शुरुआत में हिचकिचाने के बाद सलमान ने रोइंग शुरू की और अपनी पहली ही इंटर-सेंटर रेगाटा में सिल्वर मेडल जीतकर सबका ध्यान खींचा। इसके बाद 2021 में उन्हें CME पुणे में ‘आर्मी रोइंग नोड’ (Army Rowing Node) के लिए चुन लिया गया।
रोइंग इवेंट में आखिरी 500 मीटर में पलटी बाजी
एशियन गेम्स 2026 के इस मुकाबले में सलमान और सतनाम की जोड़ी शुरुआत से ही मेडल की रेस में बनी हुई थी। अंतिम दौर की रेस में आखिरी 500 मीटर के भीतर भारतीय जोड़ी ने शानदार गति बनाते हुए तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया और ब्रॉन्ज़ मेडल पक्का कर लिया।