देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। 18 सितंबर को सामने आई इस मर्मस्पर्शी घटना ने पूरे शैक्षणिक जगत को हिलाकर रख दिया है। साहिल की मौत को महज एक आत्महत्या माना जाए या किसी गहरी साजिश का नतीजा? इस सवाल ने अब राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है। इसी कड़ी में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिवंगत छात्र के परिजनों से कॉल पर बात कर उन्हें न्याय दिलाने का कड़ा भरोसा दिया है।
राहुल गांधी ने परिजनों से की बात
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आईआईटी बॉम्बे के दिवंगत छात्र साहिल वाकोडे के माता-पिता रवींद्र और सोनाली वाकोडे से वीडियो कॉल के जरिए करीब 17 मिनट बातचीत की। यह बातचीत उस समय हुई, जब साहिल के माता-पिता महाराष्ट्र के वाशिम जिले से मुंबई जा रहे थे।
राहुल गांधी ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें न्याय की कानूनी लड़ाई में हरसंभव मदद और समर्थन का भरोसा दिया। इस दौरान भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब और महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख शिवराज मोरे भी परिवार के साथ मौजूद रहे।
परिवार ने आईआईटी बॉम्बे प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
साहिल वाकोडे के परिवार ने संस्थान में उनके बेटे के साथ कथित तौर पर जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला पिछले कुछ महीनों से साहिल को कथित रूप से जातिसूचक शब्द कहते और मानसिक रूप से परेशान करते थे।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि साहिल को झूठे मामलों में फंसाने और उसका करियर बर्बाद करने की धमकियां दी जाती थीं। साहिल के पिता ने संस्थान के निदेशक प्रो. शिरीश केदारे की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। परिवार ने मामले से जुड़े अहम सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए आरोपी प्रोफेसर की गिरफ्तारी और सीबीआई जांच की मांग की है।
पुलिसिया कार्रवाई और संस्थान का आंतरिक कदम
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और आईआईटी बॉम्बे प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गई है। मुंबई पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिसकी जांच क्राइम ब्रांच कर रही है।
वहीं, निष्पक्ष जांच के मद्देनजर प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को डीन (प्रशासनिक मामले) के पद से हटाकर छुट्टी पर भेजा गया है। इसके अलावा, आईआईटी बॉम्बे के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए 10 सदस्यीय विशेष पैनल गठित किया है, जिसे एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
साहिल वाकोडे की मौत का मामला अब पुलिस जांच और संस्थागत जांच, दोनों के दायरे में है। परिवार की ओर से लगाए गए जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों की जांच पूरी होने के बाद ही उनकी पुष्टि या खंडन हो सकेगा। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है, जबकि आईआईटी बॉम्बे ने विशेष पैनल गठित किया है। ऐसे में जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता महत्वपूर्ण होगी, ताकि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सके।