रियाद: तेल की बेशुमार दौलत, आधुनिक हथियारों का बड़ा जखीरा और दुनिया के कई देशों के साथ मजबूत रिश्तों के बावजूद सऊदी अरब इन दिनों एक बड़े सुरक्षा संकट का सामना कर रहा है। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी राजधानी रियाद और यान्बु में तेल सुविधाओं को निशाना बनाया है। हमलों के बाद रियाद के आसमान में घंटों धुआं दिखाई देता रहा और कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
सऊदी अरब के लिए सबसे बड़ा सवाल सिर्फ हूती हमलों का नहीं, बल्कि इस संकट के दौरान मिलने वाली बाहरी मदद का भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान और तुर्किये से मदद मांगी गई, लेकिन दोनों देशों ने अपने समझौते की सीमाओं का हवाला देते हुए सीधे संघर्ष में उतरने से इनकार किया। अमेरिका से भी मदद की अपील की गई, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए संघर्ष में शामिल होने से दूरी बनाए रखी।
रियाद पर मिसाइल और ड्रोन की बारिश
शनिवार को हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद को निशाना बनाया। इसके साथ ही बंदरगाह शहर यान्बु में तेल से जुड़ी सुविधाओं पर भी हमले किए गए।
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने टेलीग्राम पर जारी बयान में इन हमलों की जिम्मेदारी ली। उनके मुताबिक, ये हमले यमन की राजधानी सना पर सऊदी हमलों के जवाब में किए गए।
हूती प्रवक्ता ने दावा किया कि पहले अभियान में रियाद के संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाया गया, जबकि दूसरे अभियान में यान्बु स्थित अरामको की तेल सुविधाओं पर हमला किया गया।
रियाद में कई घंटे तक उठता रहा धुआं
हमले के बाद सऊदी राजधानी में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। एएफपी के एक पत्रकार के मुताबिक, रियाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक ईंधन डिपो में आग लग गई। यहां सऊदी तेल कंपनी अरामको का ईंधन टैंक भी था, जिसके ड्रोन हमले में क्षतिग्रस्त होने की बात कही गई।
हमलों के बाद हवाई अड्डे पर उड़ानों और लैंडिंग को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। लोगों को अलर्ट जारी कर घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई।
देश के शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा भी बढ़ाई गई। कुछ समय बाद जब कई घंटे तक कोई नया हमला नहीं हुआ तो हवाई अड्डों का संचालन फिर से शुरू कर दिया गया।
हूती हमले सऊदी के लिए क्यों बने चुनौती?
हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच टकराव नया नहीं है। यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष का सीधा असर सऊदी सुरक्षा पर भी पड़ा है।
हालिया हमलों को लेकर हूती पक्ष का दावा है कि उसने बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन का इस्तेमाल किया। उनका कहना है कि इन अभियानों का लक्ष्य सऊदी की संवेदनशील सैन्य और ऊर्जा सुविधाएं थीं।
यही पहलू सऊदी अरब के लिए चुनौतीपूर्ण है। तेल और हथियारों की ताकत के बावजूद ड्रोन और मिसाइल जैसे अपेक्षाकृत कम लागत वाले हथियारों से महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।
पाकिस्तान और तुर्किये ने क्यों नहीं बढ़ाया हाथ?
रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी नेतृत्व ने हूतियों से निपटने के लिए पाकिस्तान और तुर्किये से मदद मांगी। इसके लिए दोनों देशों के साथ मौजूद सुरक्षा समझौतों का भी हवाला दिया गया।
लेकिन दोनों देशों ने कथित तौर पर इन समझौतों की सीमाओं का उल्लेख करते हुए सीधे इस संघर्ष में शामिल होने से दूरी बनाए रखी। उनका तर्क था कि संबंधित समझौते किसी नए बाहरी आक्रमण या संघर्ष की स्थिति में सहयोग से जुड़े हैं, जबकि हूतियों के साथ सऊदी अरब का संघर्ष लंबे समय से चला आ रहा है।
इस रुख ने सऊदी अरब के सामने क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग की एक बड़ी चुनौती को उजागर किया है।
अमेरिका ने भी संघर्ष से दूरी बनाई
सऊदी अरब ने अमेरिका से भी सहायता मांगी। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को किसी नए संघर्ष में शामिल करने से इनकार किया।
यह रुख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सऊदी अरब लंबे समय से अमेरिका का अहम सुरक्षा साझेदार रहा है और उसने अमेरिकी हथियारों की बड़ी खरीद भी की है। इसके बावजूद मौजूदा परिस्थिति में अमेरिकी सैन्य भागीदारी को लेकर स्थिति अलग दिखाई दे रही है।
सऊदी अरब के सामने अब सबसे बड़ा सवाल
सऊदी अरब के पास आर्थिक संसाधनों और आधुनिक सैन्य उपकरणों की कमी नहीं है। इसके बावजूद हूती हमलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि मिसाइल और ड्रोन से होने वाले लगातार हमलों से निपटने के लिए केवल महंगे हथियार पर्याप्त हैं या नहीं।
दूसरी ओर, बाहरी सहयोगियों का सीधे संघर्ष में शामिल न होना भी रियाद के लिए अहम चुनौती है। पाकिस्तान और तुर्किये ने अपने समझौतों की सीमाओं का हवाला दिया, जबकि अमेरिका ने नए संघर्ष में शामिल होने से दूरी बनाई।
ऐसे में सऊदी अरब को हूती हमलों का जवाब अपनी सैन्य और सुरक्षा क्षमताओं के दम पर ही देना पड़ रहा है। आने वाले समय में यह संघर्ष कितना बढ़ता है और क्षेत्रीय शक्तियां इसमें किस तरह की भूमिका निभाती हैं, यह पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।