Sign In
  • My Bookmarks
IPress House
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • अन्य
  • Entertainment
  • बाजार
  • लाइफस्टाइल
Reading: अमेरिका के एक फैसले से ‘चाबहार’ प्रोजेक्ट पर आया संकट!  चीन – पाकिस्तान को घेरने की रणनीति में अब क्या करेगा भारत?
Share
IPress HouseIPress House
Font ResizerAa
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • अन्य
  • Entertainment
  • बाजार
  • लाइफस्टाइल
Search
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • अन्य
  • Entertainment
  • बाजार
  • लाइफस्टाइल
Have an existing account? Sign In
Follow US
© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.
IPress House > Blog > Trending News > अमेरिका के एक फैसले से ‘चाबहार’ प्रोजेक्ट पर आया संकट!  चीन – पाकिस्तान को घेरने की रणनीति में अब क्या करेगा भारत?
Trending Newsवर्ल्ड

अमेरिका के एक फैसले से ‘चाबहार’ प्रोजेक्ट पर आया संकट!  चीन – पाकिस्तान को घेरने की रणनीति में अब क्या करेगा भारत?

news desk
Last updated: September 19, 2025 11:23 am
news desk
Share
चाबहार पर संकट!
चाबहार पर संकट!
SHARE

ईरान में भारत की सबसे महत्वाकांक्षी विदेशी परियोजनाओं में से एक चाबहार पोर्ट पर अब गंभीर संकट मंडराता दिख रहा है. पाकिस्तान को बाईपास कर मध्य एशिया तक सीधी पहुंच देने वाली लगभग 3000 करोड़ रूपये की यह रणनीतिक प्रोजेक्ट, अब अमेरिका के एक ऐलान से अनिश्चितता के घेरे में आ गया है. माना जा रहा है कि यह फैसला भारत की ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय व्यापार और सामरिक संतुलन पर गहरा असर डालेगा. साथ ही चीन पर बन रहा दवाब भी कम होगा.

‘चाबहार’ से थी भारत को रणनीतिक बढ़त!

चाबहार पोर्ट योजना ईरान के दक्षिण-पूर्व में स्थित बंदरगाह को विकसित करने की भारत की महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य भारत, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के बीच व्यापारिक गलियारे के रूप में काम करना है. इसे पाकिस्तान में चीन द्वारा विकसित किए जा रहे ग्वादर पोर्ट का जवाब भी माना गया था. चाबहार को हासिल करना भारत की एक बड़ी रणनीतिक जीत थी. इस प्रोजेक्ट के तहत भारत पाकिस्तान के रणनीतिक ग्वादर पोर्ट को बाईपास करते हुए सीधे अफगानिस्तान और यूरोप तक पहुंच जाता और इससे भारत की ऊर्जा और व्यापारिक संसाधनों की आपूर्ति भी आसान से हो सकेगी. साथ ही ग्वादर पोर्ट के जरिए चीन और पाकिस्तान की मूवमेंट पर भी नजर रहती.

कब हुई थी ‘चाबहार’ की शुरूआत ?

चाबहार पोर्ट परियोजना की औपचारिक शुरुआत 2003 में भारत और ईरान के बीच समझौते से हुई थी. उस समय भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और ईरान के राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी के बीच हुए इस समझौते के तहत भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह को विकसित करने में सहयोग करने और अफ़ग़ानिस्तान तक पहुच के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर (सड़क और रेल मार्ग) बनाने पर सहमति जताई थी. हालांकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और राजनीतिक कारणों से उस समय शुरू नहीं हो पाई.

2004 में जब मनमोहन सिंह सरकार सत्ता में आई, तब भारत ने ईरान के साथ मिलकर इस पोर्ट को विकसित करने में रुचि दिखाई, लेकिन अमेरिका और पश्चिमी देशों के ईरान पर लगे प्रतिबंध से इस प्रोजेक्ट में बाधाएं आईं. लेकिन तकनीकी अध्ययन, सड़क निर्माण और अफगानिस्तान तक संपर्क मार्ग की योजनाएं तैयार की गई. लेकिन राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय दबावों से बाधाएं भी आती रही.

2016 में भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते ने, इस परियोजना को नई गति दी. दरअसल अमेरिका ने अभी तक ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर जो कड़े प्रतिबंध लगाए थे, 2018 में उससे कुछ विशेष छूट दी गई, क्योंकि चाबहार अफगानिस्तान की शांति और पुनर्निर्माण में अच्छा कदम साबित हो सकता था.

  • पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुआ समझौता क्या भारत के लिए झटके जैसा है? इस समझौते के पीछे ट्रंप का दिमाग तो नहीं?

अमेरिका के फैसले का क्या पड़ेगा भारत पर असर ?

अब अमेरिका द्वारा चाबहार पोर्ट पर दी गई 2018 की छूट को खत्म करने का फैसला भारत के हितों पर गंभीर असर डाल सकता है. अमेरिका ने यह छूट 29 सितम्बर 2025 से वापस लेने का निर्णय लिया है. इसके बाद भारत द्वारा चाबहार पोर्ट में किया गया निवेश और परिचालन सीधे अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आ सकता है.

इस पोर्ट में भारत ने बड़ा निवेश किया है और इसके ज़रिए अफ़ग़ानिस्तान व मध्य एशिया तक बिना पाकिस्तान से गुज़रे सीधा व्यापारिक मार्ग बनाया था. अब छूट हटने से भारतीय कंपनियों और बैंकों पर अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे परियोजना की गति धीमी हो सकती है. साथ ही यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है. कूटनीतिक रूप से भी भारत के लिए अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन साधना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा. वहीं लगातार अमेरिकी नीतियों से भारत के हितों पर भी संकट मंडरा रहा है.

  • अमेरिका, भारत और पाकिस्तान: क्या ‘लॉबिंग फर्मों’ के जरिए चल रही है ‘विदेश नीति’?

Subscribe to Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

TAGGED: #AsiaNews, #BJP, #BreakingNews, #Chabahar, #chabaharProject, #Congress, #ForeignInvestment, #IndiaAfghanistan, #indiaamerica, #IndiaChina, #indiaIran, #IndianPolitics, #indianpresshouse, #IndiaPakistanNews, #PoliticalNews, #WorldNews
Share This Article
Twitter Email Copy Link Print
Previous Article तूफान बने अडानी के शेयर गिरते मार्केट में तूफान बने हुए हैं Adani के शेयर! SEBI की क्लीन चिट और पॉजिटिव रेटिंग से निवेशकों में जोश!
Next Article अपर्णा यादव की मां पर FIR जमीन घोटाले में अपर्णा यादव की मां समेत 4 पर FIR दर्ज, जाने क्या है मामला?

फीचर

View More
एपस्टीन फाइल्स में बिल गेट्स

एपस्टीन फाइल्स में बिल गेट्स! मेलिंडा ने तोड़ी चुप्पी, पैंडेमिक सिमुलेशन से लेकर भारत को “लैबोरेटरी” बनाने तक – गेट्स का गन्दा खेल

कुछ हफ्ते पहले अमेरिकी न्याय विभाग ने एक बम फोड़ दिया। जेफरी एपस्टीन - वो शख्स जिसका नाम सुनते ही…

By Gopal Singh 8 Min Read
नोम चोमस्की एपस्टीन विवाद

वह विचारक जिसने सिखाया ‘हर चीज़ पर शक करो’, खुद किस सच से भागता रहा? एपस्टीन चोमस्की के रिश्तों के खुलासों से क्यों हिल गए लेफ्टिस्ट ?

कल्पना कीजिए—आप दशकों तक किसी को अपना वैचारिक मार्गदर्शक मानते रहे। उसकी…

9 Min Read

क्या अमेरिका इज़रायल के कब्जे में है? जॉनी किर्क हत्याकांड में खुल रहे हैं चौंकाने वाले राज, पत्नी भी मोसाद एजेंट?

हाल के दिनों में मोसाद के एजेंटों को लेकर चर्चाएं तेज़ हैं।…

5 Min Read

विचार

View More

भाग-3 : सत्याग्रह का दार्शनिक आधार: टॉल्स्टॉय, गीता और जैन अहिंसा

वैश्विक गांधी: Mandela, King, Einstein ...गांधी का प्रभाव भारत की…

February 5, 2026

महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर विशेष : दक्षिण अफ़्रीका-अपमान, प्रतिरोध और सत्याग्रह का जन्म

1893 में जब महात्मा गांधी दक्षिण…

January 30, 2026

भाग–1 : दक्षिण अफ़्रीका से आधुनिक भारत तक… गांधी, नैतिक राजनीति और आज की प्रासंगिकता

गांधी — इतिहास नहीं, एक नैतिक…

January 28, 2026

मनोरंजन से वैचारिक हथियार तक… भारतीय सिनेमा में प्रोपेगेंडा का बदलता चेहरा

लोकतंत्र में सिनेमा कभी केवल मनोरंजन…

January 9, 2026

लोकतंत्र या नियंत्रित व्यवस्था? रूस-चीन की राह पर चलती भारत और संघ की अदृश्य रणनीति!

एक समय देश में कांग्रेस पार्टी…

December 15, 2025

You Might Also Like

क्लाइमेट चेंज और ह्यूमिडिटी का असर
Trending Newsलाइफस्टाइल

क्लाइमेट चेंज और ह्यूमिडिटी का असर! सेशेल्स में फैला ‘चिकनगुनिया इन्फेक्शन’, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

अगर आप नीले समंदर और सफेद रेत वाले सेशेल्स(Seychelles) के द्वीपों पर अपनी अगली छुट्टियों की प्लानिंग कर रहे हैं,…

3 Min Read
OpenAI ने लॉन्च किया अब तक का सबसे तेज़ AI मॉडल!
Trending Newsअन्य

कोडिंग की दुनिया में ‘स्पार्क’ का धमाका: OpenAI ने लॉन्च किया अब तक का सबसे तेज़ AI मॉडल!

अगर आप कोडिंग करते में दिलचस्पी रखते हैं, तो तैयार हो जाइए। OpenAI ने अपना नया मॉडल GPT-5.3-Codex-Spark लॉन्च कर…

2 Min Read
Trending Newsखेल

टी-20 विश्व कप में उलटफेर का दौर, छोटी टीमें दे रहीं कड़ी टक्कर, जिम्बाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया को हराया

टी-20 विश्व कप में इस बार जबरदस्त रोमांच देखने को मिल रहा है। तथाकथित छोटी टीमें बड़े क्रिकेट राष्ट्रों को…

2 Min Read
Trending Newsराज्य

महोबा में मिड-डे मील पर सवाल, वायरल वीडियो के बाद मचा हड़कंप

सोशल मीडिया पर कब क्या वायरल हो जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। इन दिनों उत्तर प्रदेश के महोबा जिले…

1 Min Read
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • अन्य
  • Entertainment
  • बाजार
  • लाइफस्टाइल

© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?