डिजिटल जनगणना के ऑनलाइन फॉर्म में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की जातियों के लिए ड्रॉप-डाउन मेनू उपलब्ध कराने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। बुधवार को शीर्ष अदालत ने ‘OBC फेडरेशन ऑफ इंडिया’ की ओर से दायर याचिका का निपटारा कर दिया। याचिका में मांग की गई थी कि ऑनलाइन जनगणना फॉर्म में OBC जातियों के नाम चुनने के लिए ड्रॉप-डाउन विकल्प दिए जाएं, ताकि लोगों को अपनी जाति का नाम खुद दर्ज न करना पड़े। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनगणना में जातियों को शामिल करने और उनके प्रारूप का निर्धारण करना नीतिगत विषय है। इस संबंध में निर्णय लेने का अधिकार सरकार के पास है। अदालत ने इस मामले में नीतिगत निर्णय लेने के लिए हस्तक्षेप करने से इनकार किया।
अदालत ने दी याचिकाकर्ताओं को छूट
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि नीतिगत मामलों पर फैसला सरकार और संबंधित विभाग ही बेहतर ढंग से कर सकते हैं।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता संगठन को यह छूट दी है कि वे अपनी इस मांग और सुझाव को भारत के जनगणना रजिस्ट्रार जनरल (Registrar General and Census Commissioner of India) के सामने औपचारिक रूप से प्रस्तुत कर सकते हैं।
क्या थी याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलील?
फेडरेशन की तरफ से अदालत में पेश हुईं वकील अंजनी अयंगर ने कहा कि याचिकाकर्ता देश के पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने अदालत के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखीं:
कॉलम 10 की विसंगति: जनगणना शेड्यूल के कॉलम नंबर 10 में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य जातियों से जुड़ी जानकारी मांगी जाती है।
ओपन टेक्स्ट फील्ड का मुद्दा: वर्तमान प्रक्रिया में SC और ST के अलावा अन्य सभी वर्गों के लिए जाति दर्ज करने का विकल्प एक ‘ओपन टेक्स्ट फील्ड’ (Open Text Field) के रूप में रखा गया है। इसमें लोगों को अपनी जाति का नाम मैनुअली (खुद) टाइप करके लिखना पड़ता है।
2011 की तर्ज पर ड्रॉप-डाउन की मांग: याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि जिस तरह 2011 की जनगणना के दौरान SC और ST जातियों के लिए ड्रॉप-डाउन मेनू की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी, ठीक उसी तर्ज पर OBC जातियों को भी डिजिटल फॉर्म में ड्रॉप-डाउन विकल्प मिलना चाहिए।
सटीक आंकड़ों में मिलेगी मदद: फेडरेशन के मुताबिक, ड्रॉप-डाउन मेनू होने से OBC वर्ग में आने वाली अलग-अलग जातियों और उप-जातियों का सही और सटीक विवरण दर्ज करने और उन्हें सूचीबद्ध करने में आसानी होगी।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद अब याचिकाकर्ता अपनी मांगों का ज्ञापन भारत के जनगणना रजिस्ट्रार जनरल के पास भेजेंगे। ऐसे में अब यह केंद्र सरकार और जनगणना विभाग पर निर्भर करेगा कि वह ऑनलाइन जनगणना के कॉलम में OBC जातियों के लिए ड्रॉप-डाउन मेनू की सुविधा देती है या नहीं।