नई दिल्ली: तोते को इंसानों की आवाज की नकल करते और सुने हुए शब्द दोहराते आपने जरूर देखा होगा। लेकिन उनकी प्रतिभा सिर्फ बोलने तक सीमित नहीं है। कुछ तोते परिचित लोगों को पहचान सकते हैं, नई चीजें सीख सकते हैं और मुश्किल परिस्थितियों में समस्याओं का हल निकालने की क्षमता भी दिखाते हैं। यही वजह है कि वैज्ञानिक लंबे समय से इन पक्षियों की बुद्धिमत्ता और सीखने की क्षमता पर शोध कर रहे हैं।
तोतों की इस खास क्षमता के पीछे उनके दिमाग की बनावट, सामाजिक जीवन और आसपास के माहौल से सीखने की प्रवृत्ति की अहम भूमिका होती है। गुरुग्राम स्थित डीसीसी एनिमल हॉस्पिटल के पशु चिकित्सा सेवाओं के प्रमुख और निदेशक डॉ. विनोद शर्मा के मुताबिक, तोते अपने अनुभवों से सीखने, जानकारी याद रखने और परिस्थितियों के अनुसार व्यवहार बदलने में सक्षम होते हैं। लेकिन सवाल यह है कि आकार में छोटा दिमाग होने के बावजूद तोते इतने समझदार कैसे बन जाते हैं?
दूसरे पक्षियों से अलग क्यों होती है तोतों की बुद्धिमत्ता?
तोतों की समझने और सीखने की क्षमता का एक बड़ा आधार उनके दिमाग की विशेष बनावट है। डॉ. विनोद शर्मा के अनुसार, उनके दिमाग के अगले हिस्से यानी फोरब्रेन में बड़ी संख्या में न्यूरॉन्स मौजूद होते हैं। न्यूरॉन्स ऐसी तंत्रिका कोशिकाएं हैं, जो जानकारी को समझने, सीखने, याद रखने और फैसले लेने जैसी प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाती हैं।
शोध में पाया गया है कि तोते और कौए व रैवन जैसे कुछ अन्य पक्षियों में दिमाग के संबंधित हिस्सों में न्यूरॉन्स की संख्या काफी अधिक हो सकती है। कुछ मामलों में यह संख्या बंदरों की कुछ प्रजातियों के बराबर भी पाई गई है। इससे पता चलता है कि बुद्धिमत्ता सिर्फ दिमाग के आकार पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी बनावट और तंत्रिका कोशिकाओं के संगठन का भी महत्व होता है।
तोतों में मेडियल स्पाइरिफॉर्म न्यूक्लियस नाम की एक खास तंत्रिका संरचना भी होती है। यह दिमाग के उन हिस्सों के बीच सूचना के आदान-प्रदान में मदद करती है, जो सोचने-समझने और शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करने से जुड़े हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसी संरचनाएं तोतों को जानकारी का इस्तेमाल करने और अनुभव के आधार पर अपना व्यवहार बदलने में मदद कर सकती हैं।
उनके प्राकृतिक जीवन की परिस्थितियां भी सीखने की क्षमता को बढ़ावा देती हैं। जंगल में उन्हें भोजन तलाशना, उसके संभावित ठिकानों को याद रखना और झुंड के दूसरे पक्षियों के साथ संबंध बनाए रखना पड़ता है। उनकी लंबी उम्र भी उन्हें समय के साथ नए अनुभव हासिल करने और सीखी हुई बातों को याद रखने के अवसर देती है।
आखिर इंसानों की तरह बोलना कैसे सीख लेते हैं तोते?
तोते उन पक्षियों में शामिल हैं, जो सुनी हुई आवाजों को सीखकर उनकी नकल करने में माहिर होते हैं। वे आसपास की आवाजों को सुनते हैं, उन्हें याद रखते हैं और अपने आवाज पैदा करने वाले अंगों की मदद से दोहराने की कोशिश करते हैं।
प्राकृतिक वातावरण में तोते अपने झुंड के दूसरे सदस्यों की आवाजों से सीखते हैं। इससे उन्हें आपस में संपर्क बनाए रखने और परिचित पक्षियों को पहचानने में मदद मिल सकती है। घर में रहने वाले तोते इंसानों की बोली और आसपास सुनाई देने वाली दूसरी आवाजों की नकल करना भी सीख सकते हैं।
डॉ. विनोद शर्मा के मुताबिक, बार-बार बातचीत, अभ्यास और किसी खास आवाज के बाद मिलने वाली प्रतिक्रिया से तोता शब्दों को विशेष परिस्थितियों से जोड़ना सीख सकता है। उदाहरण के लिए, घर में किसी व्यक्ति के आने पर तोता कोई जाना-पहचाना शब्द बोल सकता है, क्योंकि उसने उस शब्द को ध्यान मिलने या बातचीत शुरू होने से जोड़ लिया है।
हालांकि, इंसानों की आवाज की नकल करना और भाषा को इंसानों की तरह समझना दो अलग बातें हैं। कुछ तोते सीखे हुए शब्दों को खास संदर्भों में इस्तेमाल करने की क्षमता दिखाते हैं, लेकिन हर तोते की समझने की क्षमता एक जैसी नहीं होती। इसलिए यह मान लेना सही नहीं है कि तोता जो भी शब्द बोलता है, उसका अर्थ भी वह पूरी तरह इंसानों की तरह समझता है।
एलेक्स नाम के तोते ने वैज्ञानिकों को कैसे चौंकाया?
तोतों की बुद्धिमत्ता का चर्चित उदाहरण एलेक्स नाम का अफ्रीकन ग्रे तोता है। पशु बुद्धिमत्ता पर शोध करने वाली वैज्ञानिक आइरीन पेपरबर्ग ने लंबे समय तक उसकी क्षमताओं का अध्ययन किया था।
एलेक्स ने 100 से ज्यादा वस्तुओं के नाम सीख लिए थे। वह रंगों, आकारों और वस्तुओं में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से जुड़ी जानकारी पहचानने के साथ गिनती से संबंधित कुछ सवालों का जवाब भी दे सकता था। उसने ‘एक जैसा’ और ‘अलग-अलग’ जैसी अवधारणाओं के बीच अंतर समझने की क्षमता भी दिखाई।
इस अध्ययन ने वैज्ञानिकों का ध्यान इस ओर खींचा कि कुछ तोते केवल सुनी हुई आवाजों को दोहराने से आगे बढ़कर सीखी गई जानकारी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। हालांकि, एलेक्स की उपलब्धियों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि हर तोता समान स्तर की समझ रखता है। अलग-अलग तोतों की क्षमता उनकी प्रजाति, अनुभव और प्रशिक्षण के अनुसार बदल सकती है।
क्या तोते परिचित लोगों को पहचानने और पहेलियां सुलझाने में भी माहिर हैं?
तोते अपने आसपास के माहौल से मिली जानकारी का इस्तेमाल करके अपने व्यवहार में बदलाव कर सकते हैं। कुछ तोते परिचित लोगों और आवाजों को पहचानने, नई गतिविधियां सीखने और समस्याओं को हल करने की क्षमता दिखाते हैं।
वैज्ञानिक प्रयोगों में कुछ तोतों ने औजारों का इस्तेमाल करने और किसी काम को पूरा करने के लिए अलग-अलग तरीकों को आजमाने जैसे व्यवहार भी दिखाए हैं। ऐसी क्षमताएं बताती हैं कि वे अनुभवों से सीख सकते हैं और कुछ परिस्थितियों में सीखी हुई बातों का इस्तेमाल व्यावहारिक समस्याएं सुलझाने के लिए कर सकते हैं।
हालांकि, पहेलियां सुलझाने या औजारों का इस्तेमाल करने की क्षमता हर तोते में समान नहीं होती। यह उसकी प्रजाति, व्यक्तिगत अनुभव, प्रशिक्षण और सामने मौजूद चुनौती पर निर्भर कर सकती है।
तोतों की बुद्धिमत्ता को निखारने में माहौल की क्या भूमिका है?
तोतों में सीखने की प्राकृतिक क्षमता होती है, लेकिन उन्हें अपने दिमाग का इस्तेमाल करने के कितने अवसर मिलते हैं, यह उनके रहने के माहौल और देखभाल पर भी निर्भर करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, तोतों को सिर्फ भोजन और रहने की जगह देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें सामाजिक मेलजोल, शारीरिक गतिविधियों और नई चीजें सीखने के अवसर भी चाहिए।
1. सामाजिक मेलजोल और बातचीत
तोते सामाजिक पक्षी हैं। उनके साथ नियमित समय बिताना, उनसे बातचीत करना और आसान गतिविधियों में शामिल करना उन्हें मानसिक रूप से सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। हालांकि, हर तोते की सामाजिक जरूरतें अलग होती हैं और उसके व्यवहार के अनुसार देखभाल करना जरूरी है।
2. भोजन खोजने वाली गतिविधियां
ऐसे सुरक्षित खिलौने या फीडिंग उपकरण इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जिनकी मदद से तोते को भोजन तक पहुंचने के लिए कुछ प्रयास करना पड़े। इससे उसे खोजने, सोचने और समस्या सुलझाने का अवसर मिलता है। यह गतिविधि जंगल में भोजन तलाशने के प्राकृतिक व्यवहार से भी मेल खाती है।
3. अलग-अलग खिलौने और नई चुनौतियां
चबाने के लिए सुरक्षित खिलौने, चढ़ने के ढांचे और सरल पहेलियां तोते को व्यस्त रखने में मदद कर सकते हैं। समय-समय पर गतिविधियों में बदलाव करने से उसे नई चीजें तलाशने का मौका मिलता है। खिलौने हमेशा पक्षी के आकार और जरूरतों के मुताबिक सुरक्षित होने चाहिए।
4. इनाम देकर प्रशिक्षण
छोटे-छोटे अभ्यास सत्रों में तोते को आसान निर्देश सिखाए जा सकते हैं। सही व्यवहार करने पर उसे पसंदीदा भोजन या कोई उपयुक्त इनाम देना सकारात्मक प्रशिक्षण का हिस्सा है। इससे वह नए काम सीख सकता है और परिचित निर्देशों पर प्रतिक्रिया देना सीख सकता है।
5. पर्याप्त जगह और शारीरिक गतिविधि
तोते को पंख फैलाने, चढ़ने और चलने-फिरने के लिए पर्याप्त जगह मिलनी चाहिए। सुरक्षित वातावरण में निगरानी के साथ उड़ने और व्यायाम करने के अवसर उसके शारीरिक स्वास्थ्य और सक्रियता के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
6. संतुलित आहार, नींद और पशु चिकित्सक की देखभाल
तोते की सेहत के लिए उसकी प्रजाति के अनुरूप संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या जरूरी है। समय-समय पर पशु चिकित्सक से जांच कराने से भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान की जा सकती है। शारीरिक परेशानी का असर उसके व्यवहार और सक्रियता पर भी पड़ सकता है।
डॉ. विनोद शर्मा के मुताबिक, तोतों को मानसिक रूप से सक्रिय रखने के लिए ऐसा माहौल देना चाहिए, जिसमें वे अपने आसपास की चीजों को जान सकें, सामाजिक संपर्क बना सकें और प्राकृतिक व्यवहार दिखा सकें। पर्याप्त गतिविधियां नहीं मिलने पर कुछ तोते बोरियत, तनाव या बार-बार एक जैसा व्यवहार करने जैसी समस्याएं दिखा सकते हैं।
तोते की असली खूबी सिर्फ बोलना नहीं, सीखना भी है
तोतों की बुद्धिमत्ता उनके शब्दों की नकल करने से कहीं ज्यादा व्यापक है। उनकी दिमागी बनावट, सामाजिक संबंध, लंबी उम्र और अनुभवों से सीखने की क्षमता उन्हें कई जटिल व्यवहार करने में मदद करती है। हालांकि, हर तोते की प्रतिभा अलग होती है और उसकी क्षमताओं को समझने के लिए प्रजाति व व्यक्तिगत व्यवहार को ध्यान में रखना जरूरी है।