लखनऊ: वेतन विसंगतियों को लेकर पिछले 40 दिनों से आंदोलन कर रहे बॉन्डेड डॉक्टरों के प्रदर्शन में मंगलवार को उस समय हंगामा हो गया, जब पुलिस उन्हें हटाने के लिए पहुंची। पुलिस की बस से डॉक्टरों को ले जाने की कोशिश के दौरान कई डॉक्टर बस के सामने लेट गईं और विरोध जताया। डॉक्टरों ने कहा कि मांगों का समाधान नहीं किया जा रहा है तो अब उन्हें जबरन हटाने की कोशिश न की जाए।
पुलिस प्रदर्शनकारी डॉक्टरों को हिरासत में लेकर दूसरी जगह ले जाने के लिए बस लेकर पहुंची थी। जैसे ही कुछ डॉक्टरों को बस में बैठाने की कोशिश की गई, बाकी डॉक्टरों ने बस के आगे लेटकर विरोध शुरू कर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान करने के बजाय उन्हें हटाया जा रहा है। डॉक्टरों के इस कदम से मौके पर कुछ देर के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई।
गांधी प्रतिमा के सामने 40 दिन से चल रहा है प्रदर्शन
मामला लखनऊ के हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा स्थल का है, जहां बॉन्डेड डॉक्टर वेतन में असमानता के विरोध में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। मंगलवार को पुलिस उन्हें वहां से हटाने पहुंची थी। पुलिस वाहन और बस देखकर डॉक्टरों में नाराजगी फैल गई और उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि वह अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं और जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक पीछे नहीं हटेंगे।
डिप्टी सीएम के आश्वासन के बाद भी नहीं हुआ समाधान
बॉन्डेड डॉक्टरों का कहना है कि उनकी समस्याओं को सुनने के बाद डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने समाधान का भरोसा दिया था। डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें 24 घंटे के भीतर आदेश जारी करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन 40 दिन बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
डॉक्टरों का दावा है कि प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 2018, 2019 और 2020 बैच के बॉन्डेड डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं। उनका आरोप है कि समान डिग्री, बॉन्ड और सेवा शर्तें होने के बावजूद उनके वेतन में अंतर रखा गया है।
समान वेतन और बकाया एरियर की मांग
प्रदर्शन कर रहे डॉक्टर वेतन में समानता लागू करने के साथ ही बकाया एरियर के भुगतान की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि 2 सितंबर को डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने मांगें पूरी करने और 24 घंटे में शासनादेश जारी करने का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक उस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
डॉक्टरों का कहना है कि जब सरकार अपना वादा पूरा नहीं कर पाई तो अब आंदोलन खत्म कराने के लिए पुलिस का सहारा लिया जा रहा है। वहीं, डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने पर अड़े हुए हैं।