मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने आवेदन, आपत्तियों और दस्तावेजों के सत्यापन से जुड़ी प्रक्रियाओं में कई बदलाव किए हैं।
पश्चिम बंगाल में छूटे हुए पात्र मतदाताओं के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दिल्ली में वोटर रिकॉर्ड की विसंगतियों को दूर करने के लिए शिविर लगाने की तैयारी है। फॉर्म-6 से जुड़े अतिरिक्त घोषणापत्र और फॉर्म-7 के इस्तेमाल को लेकर भी अहम कदम सामने आए हैं।
पिछले कुछ हफ्तों में सामने आए इन घटनाक्रमों ने मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया को चर्चा में ला दिया है। आयोग की ओर से उठाए गए कदमों का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को आवेदन और रिकॉर्ड में सुधार का अवसर देना है। हालांकि, इन सभी कदमों को पुराने फैसलों की वापसी कहना सही नहीं होगा, क्योंकि अलग-अलग मामलों में बदलाव और राहत की प्रकृति अलग है।
पश्चिम बंगाल में छूटे मतदाताओं के लिए विशेष अभियान
पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल नहीं होने का मुद्दा अहम बना हुआ है। जिन पात्र लोगों के नाम सूची में दर्ज नहीं हो पाए हैं, उनके लिए फॉर्म-6 के जरिए आवेदन करने का रास्ता उपलब्ध है। इस फॉर्म का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए किया जाता है।
निर्वाचन आयोग के निर्देश पर राज्य के सभी 24 जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) ने विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत अलग-अलग स्थानों पर शिविर लगाए जा रहे हैं, ताकि पात्र मतदाता अपना नाम जांच सकें और सूची से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए जरूरी जानकारी हासिल कर सकें।
इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र नागरिक केवल प्रक्रिया संबंधी दिक्कतों के कारण मतदाता सूची से बाहर न रह जाएं।
दिल्ली में 33 लाख विसंगतियों में से 20 लाख मामलों का निपटारा
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान करीब 33 लाख रिकॉर्ड में विसंगतियां सामने आने की जानकारी दी गई थी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, इनमें से लगभग 20 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
इन विसंगतियों में मतदाताओं के रिकॉर्ड में अंतर और वर्ष 2002 की मतदाता सूची से नाम का मिलान नहीं होने जैसे मामले शामिल थे। शेष मामलों को सुलझाने के लिए प्रक्रिया जारी है।
मतदाताओं की सहायता के लिए 18 और 25 अक्टूबर को विशेष शिविर लगाए जाने की जानकारी दी गई है। ऐसे मतदाता जिनके रिकॉर्ड में कोई समस्या है, वे अपने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) या संबंधित निर्वाचन अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।
फॉर्म-6 के साथ अतिरिक्त घोषणापत्र पर क्यों उठा विवाद?
फॉर्म-6 को लेकर विवाद तब बढ़ा, जब SIR के दौरान ऑनलाइन आवेदन के साथ एक अतिरिक्त घोषणापत्र जोड़ा गया। इस दस्तावेज में आवेदकों से पुरानी मतदाता सूची और परिवार के सदस्यों के नाम से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी मांगी जा रही थी।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 5 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म-6 के संशोधित प्रारूप को मंजूरी नहीं दी थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने कहा कि मूल फॉर्म-6 में बदलाव नहीं किया गया था, बल्कि SIR के लिए अलग से अतिरिक्त घोषणापत्र जोड़ा गया था।
विवाद के बाद जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, वहां ऑनलाइन पोर्टल से इस अतिरिक्त घोषणापत्र को हटाए जाने की जानकारी सामने आई। इससे सामान्य आवेदन प्रक्रिया के तहत नए मतदाताओं के नाम जोड़ने का रास्ता पहले की तरह जारी रहने की बात कही गई।
फॉर्म-7 पर सीमा, मनमाने आवेदनों पर रोक लगाने की कोशिश
मतदाता सूची में किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने या नाम हटाने की मांग के लिए फॉर्म-7 का इस्तेमाल किया जाता है। इस फॉर्म के जरिए आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया को लेकर भी आयोग ने नियम तय किए हैं।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, SIR के दौरान एक मतदाता अधिकतम 10 फॉर्म-7 जमा कर सकेगा, जबकि सामान्य दिनों में एक महीने में अधिकतम पांच फॉर्म जमा करने की सीमा रखी गई है।
इस कदम का उद्देश्य बड़ी संख्या में आवेदन देकर मतदाता सूची से नाम हटवाने की संभावित कोशिशों पर रोक लगाना है। नाम हटाने से पहले संबंधित अधिकारियों को आवेदन की जांच करनी होगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाएगा।
नोटिस पाने वालों के घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे BLO
SIR के दौरान जिन मतदाताओं को नाम या रिकॉर्ड में विसंगति के कारण नोटिस मिला है, उनके लिए दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया आसान बनाने का भी प्रावधान किया गया है।
26 सितंबर को आयोग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, ऐसे मतदाताओं के घर जाकर बूथ लेवल ऑफिसर जरूरी दस्तावेज जुटाएंगे और उन्हें ECINet पोर्टल पर अपलोड करेंगे। इसके बाद मामले पर फैसला निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) करेंगे।
हर मतदाता को सुनवाई के लिए ERO या सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) के कार्यालय में बुलाना जरूरी नहीं होगा। जरूरत पड़ने पर ही सुनवाई की जाएगी और उसे प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन कराने की व्यवस्था भी की जा सकती है।
इस व्यवस्था से बुजुर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों और उन मतदाताओं को सुविधा मिल सकती है, जिन्हें दस्तावेज जमा करने के लिए बार-बार सरकारी कार्यालय जाना मुश्किल होता है।
मतदाता सूची की शुद्धता और पात्रता, दोनों अहम
SIR के दौरान सामने आए इन मामलों में दो पहलू अहम हैं—मतदाता सूची में गलतियों को दूर करना और किसी भी पात्र मतदाता को सूची से बाहर होने से बचाना। फॉर्म-6 के जरिए नाम जुड़वाने, फॉर्म-7 पर सीमा तय करने और दस्तावेजों के सत्यापन में सहायता देने जैसे कदम इसी प्रक्रिया से जुड़े हैं।
अब इन व्यवस्थाओं का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आवेदन कितनी आसानी से स्वीकार और जांचे जाते हैं, रिकॉर्ड की विसंगतियां कितनी तेजी से दूर होती हैं और पात्र मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का कितना प्रभावी अवसर मिलता है।