वॉशिंगटन। जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयरफोर्स बेस पर 17 जुलाई को हुए भीषण ईरानी मिसाइल हमले को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि चीन से जुड़े संस्थानों ने इस हमले से पहले और बाद में जॉर्डन के ‘मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस’ की हाई-क्वालिटी सैटेलाइट तस्वीरें ईरान को मुहैया कराई थीं।
चीनी सैटेलाइट डेटा और हमले में सीधा संबंध
अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि चीनी संस्थानों द्वारा दी गई तस्वीरों और 17 जुलाई के हमले के बीच स्पष्ट संबंध मिला है। हालांकि, अमेरिका ने चीन पर सीधे तौर पर हमले में शामिल होने का आरोप नहीं लगाया है, लेकिन इस खुलासे के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है।
- 3 अमेरिकी सैनिकों की जान गई: इस हमले में 25 वर्षीय लेफ्टिनेंट टायलर जेम्स फीहान, 19 वर्षीय प्राइवेट इसाबेला गोंजालेस और 28 वर्षीय सार्जेंट एंजेल एस. रामपर्साड की मौत हो गई थी, जबकि चार अन्य सैनिक घायल हुए थे।
- बैरक और विमानों को निशाना बनाया: 24 घंटे के भीतर ईरान ने तीन मिसाइलें दागीं, जो ठीक उसी जगह गिरीं जहां अमेरिकी सैनिक सो रहे थे।
राष्ट्रपति बैठकों से ठीक पहले बढ़ा तनाव
यह खुलासा ऐसे समय में सामने आया है जब 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच उच्चस्तरीय बैठक प्रस्तावित है। इस नए विवाद से दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
चीन ने खारिज किए आरोप, मांगे सबूत
जब अमेरिकी अधिकारियों ने इस मुद्दे को बीजिंग के सामने उठाया, तो चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए वॉशिंगटन से सबूत पेश करने की मांग की:
- चीनी दूतावास का पक्ष: वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि चीन और ईरान का द्विपक्षीय सहयोग पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में है।
- सवालों से बचाव: प्रवक्ता ने आलोचकों पर चीन को बदनाम करने का आरोप लगाया, हालांकि उन्होंने इस बात का सीधा जवाब नहीं दिया कि चीनी संस्थानों ने सैटेलाइट तस्वीरें ईरान को दी थीं या नहीं।
पहले भी लग चुके हैं जासूसी सैटेलाइट के आरोप
ईरान द्वारा चीनी तकनीक के इस्तेमाल की खबरें पहले भी आती रही हैं:
- अप्रैल की रिपोर्ट: इससे पहले अप्रैल में खबरें आई थीं कि ईरान चीनी निर्मित जासूसी सैटेलाइट का उपयोग कर रहा है।
- अमेरिकी प्रतिबंध: मई में अमेरिका ने चीन स्थित तीन सैटेलाइट कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे।
- ताजा हमला: 10 सितंबर को भी ईरान ने इसी एयर बेस को दोबारा निशाना बनाया था, जिसमें कुछ अमेरिकी विमानों के क्षतिग्रस्त होने का दावा किया गया था।