नई दिल्ली: एक तरफ अगस्त में भारत के कई हिस्सों में मानसून की बारिश जारी रही, तो दूसरी ओर देश और दुनिया के कई क्षेत्रों में तापमान ने पुराने रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए। साल 2026 का अगस्त वैश्विक स्तर पर बेहद गर्म रहा। भारत में भी बारिश के बावजूद यह महीना 1901 के बाद सबसे गर्म अगस्त दर्ज किया गया। वैज्ञानिकों के लिए चिंता की बात यह है कि बढ़ते तापमान के पीछे जलवायु परिवर्तन के साथ समुद्री सतह का बढ़ता तापमान और मजबूत होता अल नीनो भी भूमिका निभा रहा है।
यूरोपीय संघ की कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) के मुताबिक, अगस्त 2026 में धरती का औसत सतही तापमान 16.96 डिग्री सेल्सियस रहा। यह जुलाई 2023 के बराबर है, जिसे अब तक का सबसे गर्म महीना माना जाता था। अगस्त का वैश्विक तापमान औद्योगिक दौर से पहले के औसत से 1.65 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।
जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई धरती की गर्मी
धरती के लगातार गर्म होने के पीछे सबसे बड़ी वजह इंसानी गतिविधियों से बढ़ रहा जलवायु परिवर्तन है। कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों के इस्तेमाल से वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ रही है। ये गैसें गर्मी को वातावरण में रोकती हैं, जिससे वैश्विक तापमान धीरे-धीरे ऊपर जा रहा है।
इसका असर यह है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अत्यधिक गर्मी की घटनाओं की संभावना पहले के मुकाबले बढ़ती जा रही है। अगस्त 2026 में भी इसी बढ़ती गर्मी का असर कई क्षेत्रों में देखने को मिला।
अल नीनो ने भी बढ़ाया तापमान
अगस्त के असामान्य तापमान के पीछे केवल जलवायु परिवर्तन ही जिम्मेदार नहीं रहा। प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति भी मजबूत होती गई। इस दौरान समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे वातावरण में अतिरिक्त गर्मी पहुंचती है और दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर इसका असर पड़ता है।
C3S के अनुसार, अगस्त में ध्रुवीय क्षेत्रों को छोड़कर दुनिया के महासागरों की औसत सतही गर्मी 21.07 डिग्री सेल्सियस रही, जो रिकॉर्ड स्तर पर थी। प्रशांत महासागर भी काफी गर्म रहा और अल नीनो के आगे और मजबूत होने की उम्मीद जताई गई।
यूरोप से अमेरिका तक गर्मी ने तोड़े रिकॉर्ड
अगस्त की असामान्य गर्मी किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। दुनिया के कई हिस्सों में जमीन का तापमान भी अगस्त के लिहाज से रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया।
पश्चिमी यूरोप में इस दौरान सबसे गर्म गर्मियों में से एक देखी गई। कई देशों को बार-बार हीटवेव का सामना करना पड़ा और जंगलों में आग की घटनाएं भी सामने आईं। फ्रांस, इटली, बाल्कन और मध्य यूरोप के कुछ हिस्सों में अगस्त का तापमान सामान्य से कई डिग्री अधिक रहा।
अमेरिका की नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने भी अगस्त को अपने रिकॉर्ड में सबसे गर्म महीना बताया। जून से अगस्त तक की अवधि भी रिकॉर्ड में सबसे गर्म तीन महीने की अवधि रही।
बारिश के बावजूद भारत में बना नया रिकॉर्ड
भारत में अगस्त के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय रहा और कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई। इसके बावजूद तापमान ने नया रिकॉर्ड कायम किया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अगस्त 2026 भारत में 1901 के बाद से सबसे गर्म अगस्त रहा।
इस दौरान देश का औसत तापमान 28.01 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.67 डिग्री सेल्सियस अधिक था। खास चिंता रात के तापमान को लेकर रही। अगस्त में भारत का औसत न्यूनतम तापमान 24.36 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.68 डिग्री ज्यादा था।
यानी गर्मी का असर सिर्फ दिन के समय तक सीमित नहीं रहा। रातें भी सामान्य से ज्यादा गर्म रहीं। इससे लोगों, इमारतों और जमीन को दिनभर की गर्मी के बाद ठंडा होने के लिए मिलने वाला समय भी कम हुआ।
आने वाले समय में बढ़ सकती है मुश्किल
अगस्त 2026 के रिकॉर्ड तापमान के पीछे एक साथ कई वजहें काम करती नजर आईं। लंबे समय से बढ़ रहा जलवायु परिवर्तन, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा समुद्री तापमान और मजबूत होता अल नीनो वैश्विक तापमान को और ऊपर ले गए।
अगस्त का यह रिकॉर्ड सिर्फ एक महीने की असामान्य गर्मी तक सीमित नहीं है। लगातार बढ़ता तापमान इस ओर भी इशारा करता है कि दुनिया के कई हिस्सों में ऐसी अत्यधिक गर्मी आने वाले समय में ज्यादा आम हो सकती है।