मुंबई: टाटा समूह में चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे को लेकर नया मोड़ सामने आया है। टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी (NRC) ने उनके फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की है। चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त 2026 को घोषणा की थी कि वह फरवरी 2027 के बाद टाटा संस के चेयरमैन पद पर नहीं बने रहेंगे। अब 17 सितंबर को होने वाली बोर्ड मीटिंग में उनके इस्तीफे का मुद्दा उठ सकता है और उनके पद पर बने रहने की सिफारिश पर चर्चा होने की संभावना है।
इस्तीफे पर दोबारा विचार की अपील क्यों?
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने कई बड़े कारोबारी और रणनीतिक फैसले लिए हैं। उनके कार्यकाल में कई अहम प्रोजेक्ट शुरू हुए और वह समूह के AI प्रोजेक्ट की निगरानी भी कर रहे थे। ऐसे में NRC और ट्रस्ट के कुछ सदस्यों का मानना है कि इस समय नेतृत्व में बदलाव कंपनी के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है।
खास तौर पर टाटा संस की प्रस्तावित बाजार लिस्टिंग को लेकर नेतृत्व में बदलाव को अहम माना जा रहा है। कंपनी के IPO जैसे बड़े कदम के दौरान चेयरमैन बदलने से प्रक्रिया पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
17 सितंबर की बैठक में क्या हो सकता है फैसला?
टाटा संस की बोर्ड मीटिंग 17 सितंबर को प्रस्तावित है। इसी बैठक में NRC की ओर से चंद्रशेखरन के इस्तीफे पर दोबारा विचार करने की अपील का मामला उठ सकता है। कमेटी उनके पद पर बने रहने की सिफारिश भी कर सकती है।
अगर ऐसा होता है तो टाटा ट्रस्ट्स के सदस्यों के साथ मतभेद की स्थिति और गहरा सकती है। वजह यह है कि टाटा ट्रस्ट्स पहले ही चंद्रशेखरन का इस्तीफा स्वीकार करने का फैसला कर चुका है और इसकी सार्वजनिक घोषणा भी हो चुकी है।
टाटा ट्रस्ट्स से मतभेद के बाद हुआ था इस्तीफे का ऐलान
चंद्रशेखरन ने टाटा ट्रस्ट्स के साथ तीसरे कार्यकाल के विस्तार को लेकर मतभेद के बाद इस्तीफे का ऐलान किया था। अब NRC की अपील ने इस पूरे मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
IPO से पहले नेतृत्व बदलना क्यों माना जा रहा चुनौती?
टाटा संस के सामने बाजार में लिस्टिंग की चुनौती भी है। चंद्रशेखरन के पास चेयरमैन के तौर पर लंबा अनुभव है और उनके नेतृत्व में समूह ने कई महत्वपूर्ण कारोबारी फैसले लिए हैं। NRC समेत ट्रस्ट के कुछ सदस्यों का मानना है कि IPO की प्रक्रिया के दौरान अनुभवी नेतृत्व में बदलाव कंपनी के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है।
हालांकि, नोएल टाटा और चंद्रशेखरन के बीच मतभेद पहले ही सार्वजनिक रूप से सामने आ चुके हैं। ऐसे में 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग पर सबकी नजरें रहेंगी कि इस्तीफे पर क्या रुख अपनाया जाता है।