नई दिल्ली। भारतीय बैंकिंग क्षेत्र अगले 18 महीनों में एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन का गवाह बनने जा रहा है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2027 के अंत तक देश के कम से कम 6 प्रमुख बैंकों में प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पदों पर बदलाव तय हैं। इस बड़े फेरबदल को देखते हुए बैंक बोर्ड्स के सामने सही उत्तराधिकारी चुनने की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
किन दिग्गजों का कार्यकाल कब हो रहा है खत्म?
- HDFC Bank: MD और CEO शशिधर जगदीशन का कार्यकाल 26 अक्टूबर 2026 को समाप्त हो रहा है। उन्होंने अगले कार्यकाल के लिए आवेदन न करने का संकेत दिया है। डिप्टी MD कैजाद भरूचा को मुख्य आंतरिक दावेदार माना जा रहा है, हालांकि RBI का 15 साल की सीमा वाला नियम इसमें एक महत्वपूर्ण पहलू होगा।
- Kotak Mahindra Bank: CEO अशोक वासवानी का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को पूरा हो रहा है। बैंक ने अनूप साहा, पारितोष कश्यप और जयदीप हंसराज जैसे आंतरिक उम्मीदवारों में से दो नाम RBI की मंजूरी के लिए भेजे हैं।
- ICICI Bank: संदीप बख्शी के बाद बैंक में नए नेतृत्व की संभावनाओं पर नजर बनी हुई है। बैंक के पास वरिष्ठ अधिकारियों का मजबूत आंतरिक पूल मौजूद है।
- Axis Bank: अमिताभ चौधरी का कार्यकाल 31 दिसंबर 2027 तक है। RBI के आयु और कार्यकाल संबंधी नियमों के तहत उन्हें विस्तार मिल सकता है, लेकिन बैंक में सुब्रत मोहंती, मुनीश शारदा और नीरज गंभीर जैसे वरिष्ठ विकल्प भी मौजूद हैं।
- State Bank of India (SBI): देश के सबसे बड़े बैंक के चेयरमैन सीएस शेट्टी का कार्यकाल अगस्त 2027 के करीब पूरा होगा। SBI में प्रबंध निदेशकों (MDs) के बीच से ही पारदर्शी और सुव्यवस्थित तरीके से नए चेयरमैन का चयन किया जाता है।
- अन्य बैंक: IDBI Bank के CEO राकेश शर्मा (मार्च 2028), उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक और फिनो पेमेंट्स बैंक भी शीर्ष स्तर पर बदलाव की तैयारी में हैं।
बैंक बोर्ड्स के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां
- फिनटेक और NBFCs से प्रतिस्पर्धा: शीर्ष स्तर के अनुभवी बैंकिंग पेशेवरों की सीमित उपलब्धता के कारण बैंकों के बीच सही टैलेंट को अपनी ओर खींचने की होड़ मचेगी।
- स्थिरता बनाम नई सोच: बैंक बोर्ड्स को संस्थागत स्थिरता और नए दृष्टिकोण के बीच संतुलन साधना होगा।
- आंतरिक बनाम बाहरी उम्मीदवार: आंतरिक उम्मीदवार बैंक की संस्कृति और सिस्टम से अच्छी तरह वाकिफ होते हैं, जबकि बाहरी उम्मीदवारों के साथ नई रणनीति तो आती है, लेकिन बदलाव के दौर में जोखिम भी अधिक रहता है।