18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली में दुनिया के बड़े नेताओं का जमावड़ा शुरू हो गया है। भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में होने वाले सम्मेलन से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली पहुंच चुके हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भी भारत पहुंच चुके हैं। वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 सितंबर को दिल्ली पहुंचेंगे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी सम्मेलन में शामिल होंगे।
पुतिन के साथ आज अहम बातचीत
पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात में व्यापार, निवेश, ऊर्जा और रक्षा सहयोग प्रमुख मुद्दे रहेंगे। रक्षा क्षेत्र में S-400 की पांचवीं यूनिट की डिलीवरी और ब्रह्मोस-एनजी के विकास पर खास चर्चा की उम्मीद है।
इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया का तनाव और समुद्री व्यापार की सुरक्षा जैसे वैश्विक मुद्दे भी बातचीत में रह सकते हैं।
ईरान के राष्ट्रपति से पश्चिम एशिया पर चर्चा
मसूद पेजेश्कियान के साथ पीएम मोदी की बातचीत ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया में तनाव जारी है।
दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय शांति, ऊर्जा सुरक्षा, कनेक्टिविटी और द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा अहम मानी जा रही है। ईरान की मौजूदगी इस समिट को पश्चिम एशिया के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बना रही है।
शी जिनपिंग से मुलाकात पर सबसे ज्यादा नजर
12 सितंबर को पीएम मोदी और शी जिनपिंग की बहुप्रतीक्षित बैठक होगी। दोनों नेताओं के बीच LAC और सीमा प्रबंधन, व्यापार घाटा, बाजार पहुंच, निवेश और वीजा संबंधी मुद्दों पर बातचीत की उम्मीद है।
इसके साथ ही ऊर्जा सुरक्षा, पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक व्यापार पर भी चर्चा हो सकती है। यह बैठक भारत-चीन रिश्तों में लंबे समय बाद एक अहम कूटनीतिक पड़ाव मानी जा रही है।
समिट का बड़ा एजेंडा क्या?
ब्रिक्स बैठक में वैश्विक दक्षिण, आर्थिक सहयोग, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम, सप्लाई चेन, डिजिटल तकनीक और AI जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहेंगे। भारत की कोशिश है कि ब्रिक्स को विकास, सहयोग और वैश्विक चुनौतियों के समाधान का प्रभावी मंच बनाया जाए।
यानी 12 और 13 सितंबर को दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सिर्फ दुनिया के बड़े नेताओं की मुलाकात नहीं, बल्कि भारत की कूटनीति और वैश्विक भूमिका के लिहाज से बेहद अहम होने वाला है। सम्मेलन में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, सुरक्षा, तकनीक और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। रूस, चीन और ईरान जैसे अहम देशों के नेताओं की मौजूदगी इसे और महत्वपूर्ण बना रही है। अब पूरी दुनिया की नजर दिल्ली पर है।