लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोसाईगंज स्थित एक सरकारी स्कूल की बदहाल व्यवस्था और गंदगी उजागर करने वाले पत्रकार अमित यादव को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से बड़ी राहत मिली है।
अदालत ने पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई तक पुलिस को किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई न करने का आदेश दिया है।
कार्रवाई पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने माना कि स्कूल की बदहाली और खामियां सामने आने के बाद यह एफआईआर विशुद्ध रूप से बदले की भावना से दर्ज कराई गई है।
अदालत ने कहा कि स्कूल की स्थिति सुधारने के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मामले को अपना ‘ईगो इश्यू बना लिया है। कोर्ट ने कहा कि कमियां उजागर करने वाले रिपोर्टर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करना “किलिंग द मैसेंजर” जैसा है, जिसे किसी भी कानूनी व्यवस्था में जायज नहीं ठहराया जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
- स्थान: पूर्व माध्यमिक विद्यालय, बेगरिया मऊ (थाना क्षेत्र: गोसाईगंज, लखनऊ)।
- घटना: पत्रकार अमित यादव 20 अगस्त को संस्थानिक निरीक्षण के तहत स्कूल पहुंचे थे। वहां उन्होंने छात्रों के लिए साफ-सफाई की खराब व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर की बदहाली का जायजा लिया और अध्यापकों से बातचीत की।
- FIR: खबर प्रकाशित/प्रसारित होने के बाद 24 अगस्त को गोसाईगंज पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत पत्रकार के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया।
पत्रकार अमित यादव ने इस एफआईआर को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए रद्द करने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन्हें अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है।