नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर पांच मंजिला इमारत अचानक ढहने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है, जबकि राहत और बचाव दल अब तक 11 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल चुका है। आशंका है कि कई छात्र अभी भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं।
घटना के बाद एनडीआरएफ, दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और जिला प्रशासन की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं। मलबे के भीतर फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए सिलेंडर भी भेजे गए हैं। बचावकर्मियों को मलबे के अंदर से मदद के लिए आवाजें सुनाई देने की जानकारी सामने आई है, जिससे ऑपरेशन की गंभीरता और बढ़ गई है।
मलबे के नीचे से छात्रों ने किया फोन, वीडियो कॉल पर मांगी मदद
दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस की निदेशक प्रोफेसर रानी अब्बी के मुताबिक, मलबे में फंसे कुछ छात्रों ने मदद के लिए फोन और वीडियो कॉल किए थे। हालांकि, विश्वविद्यालय को अभी यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि कितने छात्रों ने संपर्क किया और इस समय उनकी स्थिति क्या है।
रेस्क्यू टीम आधुनिक कैमरों, गैस कटर और जेसीबी की मदद से मलबा हटाने में जुटी है। लोहे के बीम काटकर अंदर तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है, ताकि फंसे लोगों को जल्द बाहर निकाला जा सके।
11 लोग निकाले गए, ज्यादातर छात्र पीजी में रहते थे
पुलिस अधिकारी के अनुसार, अब तक 11 लोगों को मलबे से बाहर निकाला जा चुका है। प्रभावित लोगों में ज्यादातर छात्र बताए जा रहे हैं, जो इस इमारत में पीजी के तौर पर रह रहे थे।
इमारत रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे अचानक ढह गई। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ग्राउंड फ्लोर पर रेनोवेशन का काम चल रहा था। इसी काम को फिलहाल इमारत गिरने की संभावित वजह माना जा रहा है। इमारत में करीब 40 लोगों के रहने की क्षमता बताई गई है।
मालिक समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर, मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
हादसे की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मौके का जायजा लेने के बाद मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इमारत के मालिक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, साउथ कैंपस थाने में गुरुग्राम निवासी कथित मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों का पता लगाने के लिए पुलिस की कई टीमें लगाई गई हैं।
दिल्ली सरकार की ओर से कहा गया है कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी और कानून के तहत सख्त कार्रवाई होगी।
आसपास के पीजी खाली कराए गए, कॉलेजों ने खोले दरवाजे
हादसे के बाद आसपास की कुछ इमारतों में रहने वाले छात्रों को भी एहतियात के तौर पर बाहर निकालने के लिए कहा गया है। मैत्रेयी कॉलेज और जीसस एंड मैरी कॉलेज को पीजी में रहने वाले प्रभावित छात्रों के लिए खोल दिया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रभावित छात्रों के लिए हॉस्टल और गेस्ट हाउस की व्यवस्था के जरिए मदद उपलब्ध कराने की बात कही है। एहतियाती कदम के तौर पर आसपास के कुछ महिला छात्रावास भी खाली कराए गए हैं।
हादसे के कारण आसपास के कुछ हिस्सों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
2022 में भी हुआ था हादसा
सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने का यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2022 में भी यहां एक निर्माणाधीन तीन मंजिला मकान की छत गिर गई थी। उस समय रेनोवेशन का काम चल रहा था और छह मजदूर मलबे में फंस गए थे। हादसे में दो लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मलबे के अंदर फंसे लोगों तक सुरक्षित पहुंचना है। बचाव दल लगातार आवाजों और कैमरों की मदद से संभावित स्थानों की पहचान कर रेस्क्यू अभियान आगे बढ़ा रहा है।