हवाना: अमेरिका ने क्यूबा पर नए प्रतिबंध लगाकर पहले से गंभीर आर्थिक और ऊर्जा संकट से जूझ रहे देश पर दबाव और बढ़ा दिया है। अमेरिकी सरकार ने जिन लोगों और संस्थाओं को निशाना बनाया है, उनमें क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो के पोते फिदेल अर्नेस्टो कास्त्रो और तेल उद्योग से जुड़ी कंपनी अबापेट भी शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि ये प्रतिबंध कास्त्रो से जुड़े भ्रष्ट वित्तीय और खुफिया नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई का हिस्सा हैं।
ऊर्जा संकट के बीच क्यूबा को बड़ा झटका
अबापेट क्यूबा की बिजली व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जरूरी विशेष उपकरणों और कलपुर्जों के आयात से जुड़ी कंपनी है। प्रतिबंध मामलों के विशेषज्ञ और ओब्सीडियन रिस्क एडवाइजर्स के मैनेजिंग पार्टनर ब्रेट एरिकसन के मुताबिक, अमेरिका के इन कदमों से क्यूबा के लिए जरूरी मशीनों और उपकरणों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
एरिकसन ने कहा कि प्रतिबंधों का एक बड़ा असर क्यूबा के ऊर्जा संकट पर पड़ सकता है। उनका मानना है कि इससे देश में पहले से खराब बिजली व्यवस्था को संभालना और मुश्किल हो सकता है।
क्या क्यूबा में सत्ता परिवर्तन चाहता है अमेरिका?
ब्रेट एरिकसन ने कहा कि अमेरिका क्यूबा पर लगातार दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन का रुख क्यूबा में सत्ता परिवर्तन की दिशा में दबाव बनाने वाला दिखाई देता है।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो क्यूबा के मामले में पीछे हटने के मूड में नहीं हैं और आने वाले समय में दबाव और बढ़ सकता है।
प्रतिबंधों से बचने के लिए नए रास्ते खोजेगा क्यूबा
एरिकसन का अनुमान है कि क्यूबा इन प्रतिबंधों से बचने के लिए दूसरे रास्ते तलाशेगा, क्योंकि उसके पास बहुत ज्यादा विकल्प नहीं हैं। जरूरी उपकरणों और कलपुर्जों को हासिल करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है।
हालांकि, ऐसे रास्ते क्यूबा के लिए महंगे साबित हो सकते हैं। इससे सामान और सेवाओं की लागत बढ़ने के साथ महंगाई पर भी दबाव पड़ सकता है और पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था को और नुकसान होने की आशंका है।
रुबियो ने कास्त्रो के नेटवर्क पर साधा निशाना
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि जिन लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, वे कास्त्रो के भ्रष्ट वित्तीय और खुफिया नेटवर्क का हिस्सा हैं।
रुबियो ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वह इस संकल्प पर कायम हैं कि क्यूबा आजाद होगा। उनके इस बयान से साफ है कि अमेरिकी प्रशासन क्यूबा के खिलाफ अपनी सख्त नीति में फिलहाल ढील देने के पक्ष में नहीं है।
क्यूबा ने अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार
क्यूबा की मौजूदा स्थिति को लेकर उप प्रधानमंत्री और विदेशी निवेश मंत्री ऑस्कर पेरेज-ओलिवा फ्रागा ने अमेरिका की सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, मेक्सिको में क्यूबा के राजदूत यूजेनियो मार्टिनेज एनरिकेज ने अमेरिकी प्रतिबंधों की निंदा की है।
इससे पहले मई में डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को लेकर कहा था कि यह एक विफल देश है और उसके पास तेल नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि अमेरिका वहां के लोगों की मदद करने के लिए मौजूद है।