नई दिल्ली: हिंदू कैलेंडर का छठा महीना भाद्रपद यानी भादो शुरू हो चुका है। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से इस महीने का विशेष महत्व माना जाता है। जन्माष्टमी, हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी और अनंत चतुर्दशी जैसे प्रमुख पर्व इसी महीने में आते हैं। पूजा-पाठ के साथ भाद्रपद में खान-पान को लेकर भी कुछ खास परंपराएं बताई गई हैं। ऐसे में इस दौरान क्या खाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए, इसे जानना जरूरी हो जाता है।
भाद्रपद में खान-पान के क्या नियम हैं?
भाद्रपद में मौसम में बदलाव होने लगता है। उमस और बदलते मौसम का असर पाचन तंत्र पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से इस दौरान हल्का, ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं में भी इस महीने भोजन को लेकर संयम बरतने पर जोर दिया गया है।
इन चीजों से दूरी बनाने की मान्यता
शास्त्रों में भाद्रपद महीने के दौरान कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज करने की बात कही गई है। इनमें मांस, शहद, गुड़, मूली, बैंगन, चुकंदर, खीरा, ककड़ी और तरबूज शामिल हैं। इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्जियों, मसूर की दाल और चने की दाल को लेकर भी परहेज की मान्यता बताई गई है।
व्रत में क्या खा सकते हैं?
भाद्रपद में व्रत रखने वाले लोग अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। इस दौरान फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन लिए जा सकते हैं।
मौसमी फलों में सेब, केला, अनार और नाशपाती का सेवन भी किया जा सकता है। हालांकि, भोजन को बहुत अधिक तला-भुना और मसालेदार बनाने से बचना बेहतर माना जाता है।
साफ-सफाई का भी रखें खास ध्यान
भाद्रपद में खान-पान के साथ भोजन की स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही गई है। बदलते मौसम में साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। ऐसे में ताजा भोजन करें और खाने-पीने की चीजों को स्वच्छ तरीके से तैयार करने की कोशिश करें।