नई दिल्ली: गणेश चतुर्थी को लेकर देशभर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। घरों और पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना की तैयारियां चल रही हैं। ऐसे में गणपति बप्पा की मूर्ति खरीदते समय कई लोग इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि सूंड किस दिशा में मुड़ी होनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेशजी की प्रतिमा के स्वरूप और सूंड की दिशा का विशेष महत्व माना जाता है।
घर के लिए कैसी गणेश प्रतिमा मानी जाती है शुभ?
गणेशजी की मूर्ति खरीदते समय उनकी सूंड की दिशा के साथ उनकी मुद्रा पर भी ध्यान देने की मान्यता है। वास्तु और ज्योतिष से जुड़ी मान्यताओं में सूंड की दिशा को पूजा और घर के वातावरण से जोड़कर देखा जाता है। गृहस्थ परिवारों के लिए आमतौर पर ऐसी प्रतिमा को शुभ माना जाता है, जिसकी पूजा सामान्य रूप से आसानी से की जा सके।
बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति
मान्यता के अनुसार, घर में स्थापना के लिए बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति की प्रतिमा को शुभ माना जाता है। ऐसी प्रतिमा को सुख, शांति और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। यह भी मान्यता है कि गृहस्थ जीवन में पूजा के दौरान होने वाली छोटी-मोटी कमियों का इस स्वरूप की पूजा पर विशेष दोष नहीं माना जाता।
दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति क्यों माने जाते हैं विशेष?
दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति को दक्षिणामुखी गणेश कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इनका संबंध सूर्य नाड़ी से माना जाता है और इस स्वरूप में ऊर्जा अधिक तीव्र मानी जाती है।
इसी वजह से दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति की पूजा में शुद्धता, समय और पूजा-विधि का विशेष ध्यान रखने की बात कही जाती है। ऐसी प्रतिमाएं आमतौर पर मंदिरों में स्थापित किए जाने की मान्यता है।
मूर्ति खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
घर के लिए गणेशजी की प्रतिमा लेते समय केवल सूंड की दिशा ही नहीं, बल्कि प्रतिमा के पूरे स्वरूप को भी देखना चाहिए। मान्यता के अनुसार, बैठे हुए और आशीर्वाद देते गणेशजी की प्रतिमा घर के लिए शुभ मानी जाती है।
प्रतिमा में भगवान गणेश के हाथ में मोदक और उनके वाहन मूषक का होना भी जरूरी बताया गया है। मूर्ति कहीं से टूटी या चटकी हुई नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, स्थापना के लिए प्राकृतिक मिट्टी से बनी पर्यावरण के अनुकूल प्रतिमा को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है।