Sign In
  • My Bookmarks
Indian Press House
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Reading: वोटर लिस्ट पर फिर सियासी संग्राम, महाराष्ट्र से दिल्ली तक लाखों नाम बाहर; विपक्ष ने उठाए सवाल
Share
Indian Press HouseIndian Press House
Font ResizerAa
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Search
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.
Indian Press House > Blog > सियासी > वोटर लिस्ट पर फिर सियासी संग्राम, महाराष्ट्र से दिल्ली तक लाखों नाम बाहर; विपक्ष ने उठाए सवाल
सियासी

वोटर लिस्ट पर फिर सियासी संग्राम, महाराष्ट्र से दिल्ली तक लाखों नाम बाहर; विपक्ष ने उठाए सवाल

news desk
Last updated: September 2, 2026 12:53 pm
news desk
Share
SHARE

नई दिल्ली. चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। महाराष्ट्र और दिल्ली में जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम शामिल नहीं होने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। वहीं झारखंड में बीजेपी कार्यकर्ताओं पर कथित तौर पर मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश करने के आरोप भी लगाए गए हैं।

Contents
महाराष्ट्र में 2 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहरराहुल गांधी ने पूछा- कौन सी वोटर लिस्ट सही?झारखंड में मुस्लिम वोटरों के नाम हटाने का आरोपकपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग पर साधा निशानादिल्ली में भी 47 लाख से ज्यादा नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहरकेजरीवाल बोले- आबादी घटाने का तरीका है SIR?बंगाल में भी TMC लगातार हमलावरकर्नाटक में भी SIR पर कांग्रेस की आपत्तिSIR पर चुनाव आयोग का क्या तर्क है?SIR पर असली सवाल अब क्या है?

हालांकि, चुनाव अधिकारियों का कहना है कि ड्राफ्ट लिस्ट से नाम हटने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति का अंतिम रूप से मतदान का अधिकार खत्म हो गया है। कई नाम मृत, स्थानांतरित, अनुपलब्ध या एक से ज्यादा जगह दर्ज होने जैसे कारणों से ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए हैं।

महाराष्ट्र में 2 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर

महाराष्ट्र में SIR के बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर सबसे ज्यादा राजनीतिक विवाद देखने को मिल रहा है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, ड्राफ्ट रोल में 7.71 करोड़ से ज्यादा मतदाता शामिल हैं, जबकि करीब 2.06 करोड़ नाम इसमें शामिल नहीं किए गए।

अधिकारियों के मुताबिक, ये मतदाता ऐसे थे जिनके एन्यूमरेशन फॉर्म प्राप्त नहीं हो सके। इनमें कुछ लोग अपने पते पर नहीं मिले, कुछ की मृत्यु हो चुकी थी और कुछ लोग अपना निवास स्थान बदल चुके थे।

यही आंकड़ा अब विपक्ष के राजनीतिक हमले का आधार बन गया है।

राहुल गांधी ने पूछा- कौन सी वोटर लिस्ट सही?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने SIR को लेकर चुनाव आयोग और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए सवाल किया कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदाताओं की संख्या और SIR के ड्राफ्ट रोल में इतना बड़ा अंतर कैसे आया।

राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के अलावा पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हटाए गए नामों और बाद में अपील के जरिए दोबारा जोड़े गए नामों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने इसे “वोट चोरी” से जोड़ते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए।

हालांकि, ये विपक्ष के राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें चुनाव आयोग के अंतिम आंकड़ों तथा प्रक्रिया के निष्कर्षों के संदर्भ में देखा जाना बाकी है।

झारखंड में मुस्लिम वोटरों के नाम हटाने का आरोप

झारखंड को लेकर इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद विवाद और बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, गोड्डा में बीजेपी के बूथ लेवल एजेंट की ओर से कथित तौर पर फॉर्म-7 के जरिए कुछ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाने की मांग की गई।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कम से कम चार बूथों पर बूथ लेवल अधिकारियों ने ऐसे आवेदन स्वीकार करने से इनकार कर दिया, क्योंकि उन्हें आवेदन प्रक्रिया के अनुरूप या पर्याप्त आधार वाला नहीं लगा।

रिपोर्ट के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश का दावा किया गया, उनमें कई परिवार लंबे समय से उसी इलाके में रह रहे हैं। इनमें कुछ मतदाताओं का 2003 के बड़े मतदाता पुनरीक्षण के दौरान सत्यापन भी हो चुका था।

इस मामले में मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और अंतिम चुनावी रिकॉर्ड से सत्यापन महत्वपूर्ण होगा।

कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति फॉर्म-7 के जरिए किसी मतदाता का नाम हटाने की मांग करता है तो उस दावे की जांच जरूरी है।

सिब्बल ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया का इस्तेमाल बीजेपी के पक्ष में और उसके विरोध में मतदान करने वाले लोगों के नाम प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी राजनीतिक पक्षपात के आरोप लगाए। हालांकि, ये आरोप सिब्बल के राजनीतिक बयान हैं और चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर उसका आधिकारिक पक्ष अलग से महत्वपूर्ण होगा।

दिल्ली में भी 47 लाख से ज्यादा नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर

दिल्ली में भी SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने राजनीतिक विवाद पैदा कर दिया है। करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं वाली पिछली सूची के मुकाबले ड्राफ्ट रोल में 47 लाख से ज्यादा नाम शामिल नहीं हैं।

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के मुताबिक, इनमें बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की है जो अपने पते पर नहीं मिले या कहीं और स्थानांतरित हो चुके हैं। इसके अलावा करीब 2.82 लाख मतदाता मृत पाए गए, जबकि लगभग 1.41 लाख नाम एक से ज्यादा जगहों पर दर्ज मिले।

दिल्ली में ड्राफ्ट स्टेज पर करीब 33 फीसदी नामों का बाहर होना राजनीतिक दलों के लिए बड़ा मुद्दा बन गया है।

केजरीवाल बोले- आबादी घटाने का तरीका है SIR?

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के आंकड़ों को लेकर चुनाव आयोग पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि अगर इसी तरह बड़ी संख्या में नाम हटाए जाते रहे तो SIR के जरिए देश की मतदाता संख्या में भारी कमी आ सकती है।

केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर भी राजनीतिक हमला किया और SIR को लेकर सवाल खड़े किए।

बंगाल में भी TMC लगातार हमलावर

पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर तृणमूल कांग्रेस पहले से ही चुनाव आयोग और बीजेपी पर आरोप लगाती रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि SIR के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और इसका चुनावी फायदा बीजेपी को मिला।

वहीं बंगाल में करीब 36.6 लाख मामलों का निपटारा अभी बाकी बताया जा रहा है। ये मामले अपीलेट ट्रिब्यूनल के स्तर पर लंबित हैं।

मुस्लिम मतदाताओं को लेकर भी राज्य में विशेष चिंता जताई गई है। TMC के बागी नेता यूसुफ पठान ने लंबित मामलों के जल्द निपटारे की मांग को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा था।

कर्नाटक में भी SIR पर कांग्रेस की आपत्ति

कर्नाटक में भी SIR की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर मतदाता सत्यापन के लिए पर्याप्त समय देने और निर्धारित प्रक्रिया का सख्ती से पालन करने की मांग की थी।

शिवकुमार के मुताबिक, राज्य में 1.08 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं को ASDDO के तौर पर मार्क किया गया है। इसके अलावा करीब 43 लाख मतदाताओं को लॉजिकल गड़बड़ियों को लेकर नोटिस भेजे जाने की बात कही गई है।

कांग्रेस का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर नामों की जांच में पारदर्शिता और मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

SIR पर चुनाव आयोग का क्या तर्क है?

चुनाव आयोग लगातार यह कहता रहा है कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है। SIR का उद्देश्य ऐसे नामों की पहचान करना है जो मृत हो चुके हैं, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गए हैं, एक से अधिक जगहों पर दर्ज हैं या सत्यापन प्रक्रिया में उपलब्ध नहीं पाए गए।

इसलिए ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होने को अंतिम रूप से मतदाता सूची से नाम हटना नहीं माना जाना चाहिए। संबंधित मतदाताओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलता है।

SIR पर असली सवाल अब क्या है?

SIR को लेकर मौजूदा विवाद केवल कितने नाम हटे, इस आंकड़े तक सीमित नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि किन आधारों पर नाम हटाए गए, कितने लोगों को दोबारा मौका मिला और कितने नाम दावे-आपत्तियों के बाद वापस जोड़े गए।

महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक, झारखंड और पश्चिम बंगाल के आंकड़े आने के बाद अब चुनाव आयोग की प्रक्रिया की पारदर्शिता, BLO की भूमिका और राजनीतिक दलों की शिकायतों पर नजर रहेगी।

फिलहाल विपक्ष इसे मताधिकार और लोकतंत्र से जोड़कर देख रहा है, जबकि चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट करने की प्रक्रिया बता रहा है। अंतिम मतदाता सूची और दावे-आपत्तियों के निपटारे के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

Subscribe to Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

TAGGED: Bengal SIR, Delhi SIR, Election Commission, Gyanesh Kumar, Jharkhand SIR, Karnataka SIR, Maharashtra SIR, Rahul Gandhi SIR, SIR 2026, SIR Voter List, Special Intensive Revision, Voter List 2026
Share This Article
Twitter Email Copy Link Print
Previous Article अखिलेश के साथ फिर मैदान में उतरेगी कांग्रेस, 120 सीटों पर नजर; यूपी चुनाव से पहले शुरू हुई बड़ी सियासी तैयारी
Next Article उमर सरकार के खिलाफ BJP का हल्लाबोल, NC का पलटवार; श्रीनगर में हाई वोल्टेज सियासी ड्रामा

फीचर

View More

Makkah Pact: क्या मक्का समझौते से एशिया में बनेगा ‘इस्लामिक नाटो’? भारत और वैश्विक शक्तियों की पैनी नज़र

क्या वेस्ट एशिया अब NATO जैसी सैन्य ताकत का नया केंद्र बनने जा रहा है? क्या दुनिया के मुस्लिम देश…

By news desk 6 Min Read

न फोन था, न रेडियो, न इंटरनेट… फिर पुराने जमाने में पहाड़ से गांव तक कैसे पहुंचती थी बाढ़-भूस्खलन की खबर? तरीका जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली: आज पहाड़ों में बाढ़, भूस्खलन या हिमस्खलन का खतरा हो…

10 Min Read

अरब देशों में बढ़ रहा ‘डबल अटैक’! पहले पानी की कमी, अब खाने पर संकट, जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली/रियाद। अरब देशों के सामने जलवायु परिवर्तन का खतरा अब सिर्फ…

6 Min Read

विचार

View More

भारतीय रेडियो प्रसारण के 100 वर्ष: ‘श्रुति’ की परंपरा से ‘मन की बात’ तक… ऐसा रहा जादुई तरंगों का 100 साल का सफर

उस अविस्मरणीय पल को याद कीजिए, जब आपने पहली बार…

August 13, 2026

क्या कभी सोचा है कि आखिर कैसे दक्षिण से उत्तर तक पूरे देश में छा जाते हैं बादल और शुरू हो जाती है झमाझम बारिश?

नई दिल्ली: देश में मानसून की…

July 9, 2026

‘एक भी अमेरिकी सैनिक जिंदा नहीं लौटेगा’… आखिर ईरान ने अमेरिका को क्यों दी खुली चेतावनी? जानिए कैसे बढ़ा नया सैन्य तनाव

तेहरान: पश्चिम एशिया में अमेरिका और…

July 9, 2026

अमीर पति बनेगा सहारा या मुसीबत? डेटिंग ऐप CEO की सलाह से छिड़ी बहस, महिलाओं से कहा- ‘कमाई का अंतर ज्यादा हो तो सोचिए’

नई दिल्ली: शादी और रिश्तों को…

June 9, 2026

मानसून की दस्तक में फिर देरी, आखिर कब पहुंचेगा केरल? जानिए क्यों बार-बार बदल रही है IMD की तारीख

नई दिल्ली: देश के कई राज्यों…

June 4, 2026

You Might Also Like

Trending Newsसियासी

राम मंदिर ट्रस्ट को मिला पहला CEO, रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर लगी मुहर

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिलने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक,…

3 Min Read
Trending Newsसियासी

CJP Politics: 100 फोन कॉल का दावा, BJP से भी ऑफर! सौरव दास बोले- अभी प्रेशर ग्रुप हैं, राजनीति का फैसला भविष्य में

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास ने चुनावी राजनीति में उतरने को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने…

6 Min Read
Trending Newsसियासी

GEN-ALPHA की गजब पहल! 7 साल की बच्ची पहुंची DM के पास, सड़क की बदहाली की खोली पोल

देश में GEN-Z के बाद अब GEN-ALPHA भी अपनी आवाज बुलंद करता नजर आ रहा है। मऊ जिले से सामने…

3 Min Read
Trending Newsसियासी

ओवैसी की AIMIM को बड़ा झटका, असीम वकार कांग्रेस में शामिल; 2027 चुनाव से पहले क्या बदलेगा समीकरण?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।…

5 Min Read
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य

© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?