देश में GEN-Z के बाद अब GEN-ALPHA भी अपनी आवाज बुलंद करता नजर आ रहा है। मऊ जिले से सामने आया एक ऐसा मामला हर किसी का ध्यान खींच रहा है। वार्ड संख्या-17 की सात साल की समरा नाज अपने इलाके की बदहाल सड़क की समस्या लेकर सीधे जिलाधिकारी (DM) के पास पहुंच गई और उसकी मरम्मत कराने की अपील की। सोचिए, जिस उम्र में बच्चों के हाथों में खिलौने और किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में समरा को अपनी परेशानी लेकर अधिकारी के दरवाजे तक पहुंचना पड़ा।
क्या है पूरा मामला?
मामला मऊ जिले के वार्ड संख्या-17 का है। यहां रहने वाली समरा नाज ने जिलाधिकारी को बताया कि उनके इलाके की सड़क बेहद खराब हालत में है। इस वजह से उसे स्कूल आने-जाने में काफी परेशानी होती है। समरा ने बताया कि कई बार खराब रास्ते के कारण वह गिर जाती है, जिससे उसकी स्कूल ड्रेस गंदी हो जाती है और उसे स्कूल में डांट भी सुननी पड़ती है।
जिलाधिकारी आनंद वर्धन ने बच्ची से बातचीत के दौरान पूछा कि वह स्कूल किस साधन से जाती है। इस पर समरा ने बताया कि वह ऑटो से स्कूल जाती है, लेकिन सड़क की खराब स्थिति के कारण रास्ते में उसे काफी परेशानी होती है।
क्या बोले जिलाधिकारी?
समरा नाज की शिकायत को जिलाधिकारी आनंद वर्धन ने गंभीरता से सुना और उसकी समस्या के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने बच्ची को तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया।
डीएम ने बताया कि बच्ची की शिकायत के आधार पर सड़क की स्थिति की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई करते हुए सड़क को दुरुस्त कराने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। जिलाधिकारी ने मीडिया से बातचीत के दौरान भी इस पूरे मामले की जानकारी दी और सड़क की समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया।
समरा नाज की यह पहल भले ही एक छोटी बच्ची की शिकायत हो, लेकिन इसने व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। जिस उम्र में बच्चों को स्कूल जाने और पढ़ाई करने की चिंता होनी चाहिए, उस उम्र में एक बच्ची को अपने रास्ते की बदहाली के खिलाफ आवाज उठानी पड़ रही है।
हालांकि, समरा का सीधे डीएम तक पहुंचना यह भी दिखाता है कि अपनी समस्या के समाधान के लिए आवाज उठाने की कोई उम्र नहीं होती। अब सबकी नजर इस बात पर है कि समरा की शिकायत के बाद सड़क की स्थिति कब तक सुधरती है और क्या उसे स्कूल जाते समय खराब रास्ते और गंदी ड्रेस की परेशानी से आखिरकार निजात मिल पाती है।