नई दिल्ली: दिल्ली की एंटी करप्शन ब्रांच ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई दिल्ली जल बोर्ड में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में की गई है। सत्येंद्र जैन के अलावा दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी उदित प्रकाश राय समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट परियोजनाओं से जुड़े टेंडर मामले में हुई है। इस मामले में वर्ष 2024 में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर कार्रवाई की गई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, दिल्ली जल बोर्ड की चार बड़ी परियोजनाओं में कथित तौर पर 1.943 करोड़ रुपये के मल्टी-टेंडर घोटाले की जांच की जा रही है।
सत्येंद्र जैन समेत इन 6 लोगों की गिरफ्तारी
गिरफ्तार किए गए लोगों में पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन और दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय शामिल हैं। इनके अलावा दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव तथा निजी व्यक्ति नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा को भी गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में सरकारी अधिकारी, सलाहकार और निजी कारोबार से जुड़े व्यक्ति शामिल हैं।
केजरीवाल ने गिरफ्तारी पर बीजेपी को घेरा
सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा के इशारे पर सत्येंद्र जैन को फिर से गिरफ्तार किया गया है। केजरीवाल ने इस मामले को फर्जी बताया।
11 मई 2024 को दर्ज हुआ था मामला
यह मामला 11 मई 2024 को सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। शिकायत दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की क्षमता बढ़ाने और उन्हें उन्नत करने से जुड़े टेंडर की प्रक्रिया में कथित बड़े पैमाने पर अनियमितता को लेकर की गई थी।
शिकायत में टेंडर की शर्तों में कथित हेरफेर और आपराधिक साजिश के आरोप भी लगाए गए थे। इसी मामले की जांच के दौरान अब छह लोगों की गिरफ्तारी की गई है।
एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए शर्तें बदलने का आरोप
जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर की तकनीकी शर्तों को इस तरह तैयार किया गया था कि एक विशेष तकनीक और निजी कंपनी M/s Euroteck Environment Pvt. Ltd. को लाभ मिल सके। एजेंसी के मुताबिक, टेंडर की शर्तों के जरिए दूसरी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा को सीमित करने का प्रयास किया गया।
एसीबी के अनुसार, प्रस्तावित पायलट अध्ययन नहीं कराया गया था, लेकिन टेंडर में एक विशेष तकनीक और माध्यम के इस्तेमाल से संबंधित पाबंदियां शामिल की गईं। जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया कि उपचारित अपशिष्ट जल से जुड़े जरूरी मानकों को टेंडर से हटा दिया गया था।
जांच एजेंसी के मुताबिक, तकनीकी विनिर्देशों में भी बदलाव किए गए। आरोप है कि इन बदलावों के कारण सरकारी खजाने पर भारी आर्थिक बोझ पड़ने की स्थिति बनी।
निजी लोगों, अधिकारियों और बिचौलियों के बीच बातचीत का दावा
जांच एजेंसी ने दावा किया कि निजी लोगों, कुछ सरकारी अधिकारियों और बिचौलियों के बीच लगातार बातचीत हो रही थी। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के दौरान टेंडर की शर्तों, उनमें किए गए बदलाव और अन्य दस्तावेजों के आदान-प्रदान से संबंधित जानकारी मिलने की बात कही गई है।
एसीबी का कहना है कि इन दस्तावेजों और बातचीत से निजी कंपनियों तथा सरकारी अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत के संकेत मिले। एजेंसी के अनुसार, इसी कथित मिलीभगत के जरिए एक विशेष तकनीक उपलब्ध कराने वाले को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों में हेरफेर की गई।