कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कोलकाता हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी गई थी। अदालत के इस फैसले के बाद फिलहाल ऋतब्रत बनर्जी नेता प्रतिपक्ष के पद पर बने रहेंगे।
यह मामला विधानसभा अध्यक्ष के उस निर्णय से जुड़ा था, जिसमें टीएमसी से निष्कासित ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में आधिकारिक नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिया गया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
ममता गुट की मांग पर नहीं मिली राहत
याचिका में विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर सवाल उठाते हुए ममता बनर्जी समर्थक नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता देने की मांग की गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष का फैसला बरकरार रहा।
पहले भी नहीं मिली थी अंतरिम राहत
इससे पहले जस्टिस कृष्णा राव की एकल पीठ ने भी ममता गुट को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। उस आदेश में विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस द्वारा ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में दी गई मान्यता को बरकरार रखा गया था। बाद में इस फैसले को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में अपील दायर की गई, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली।
बंगाल विधानसभा में जारी है सियासी खींचतान
294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायक हैं। खबर के मुताबिक, इनमें से लगभग 60 विधायक बागी गुट के साथ बताए जा रहे हैं, जिसका नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने 64 विधायकों के समर्थन का दावा भी किया था। वहीं, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल गुट के साथ फिलहाल 20 विधायक बताए जा रहे हैं।
फिलहाल नहीं बदलेगी नेता प्रतिपक्ष की तस्वीर
हाईकोर्ट के फैसले के बाद फिलहाल पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर कोई बदलाव नहीं होगा। अदालत के आदेश से स्पष्ट हो गया है कि ऋतब्रत बनर्जी ही विधानसभा में विपक्ष के नेता बने रहेंगे, जबकि इस मुद्दे पर ममता गुट को न्यायिक स्तर पर राहत नहीं मिल सकी।