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पेपर लीक आंदोलन में छात्रों को बड़ी राहत! प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस वापस ले सकती हैं सरकारें, सुप्रीम कोर्ट ने किया साफ

vineet verma
Last updated: August 3, 2026 8:59 pm
vineet verma
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नई दिल्ली: पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट से अहम राहत भरी टिप्पणी सामने आई है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को स्पष्ट किया कि संबंधित राज्य सरकारें चाहें तो ऐसे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस ले सकती हैं या बंद कर सकती हैं। हालांकि यह राहत उन लोगों पर लागू नहीं होगी, जिनके खिलाफ पहले से गंभीर और जघन्य आपराधिक मामले दर्ज हैं।

Contents
‘आपराधिक रिकॉर्ड’ का मतलब क्या है, कोर्ट ने किया स्पष्टयाचिकाकर्ताओं की दलील के बाद आई स्पष्टतापुलिस कार्रवाई और हिंसा से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई जारीएसआईटी गठन पर केंद्र ने मांगा और समयप्रदर्शन में शामिल लोगों को लेकर सरकार का दावा

यह टिप्पणी उस आदेश के पांच दिन बाद आई है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा था कि दिल्ली और अन्य राज्य दर्ज एफआईआर की जांच जारी रख सकते हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा।

‘आपराधिक रिकॉर्ड’ का मतलब क्या है, कोर्ट ने किया स्पष्ट

सोमवार को जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने साफ किया कि ‘आपराधिक रिकॉर्ड’ से आशय केवल गंभीर और जघन्य अपराधों से है। सुनवाई के दौरान केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा कि सरकार ने अदालत के पहले के आदेश को इसी अर्थ में समझा है।

याचिकाकर्ताओं की दलील के बाद आई स्पष्टता

अदालत ने यह स्पष्टीकरण उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया, जिनमें कहा गया था कि 28 जुलाई का आदेश शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल ऐसे लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने में बाधा बन सकता है, जिनका कोई गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

दिल्ली में आंदोलन का नेतृत्व करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र सरकार के साथ हुए समझौते का हवाला देते हुए कहा था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाएगी। संगठन के प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया था कि अदालत का पूर्व आदेश सरकार के उस आश्वासन से अलग प्रतीत होता है, जिसमें शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से निशाना नहीं बनाने की बात कही गई थी।

पुलिस कार्रवाई और हिंसा से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई जारी

सुप्रीम कोर्ट फिलहाल 20 जुलाई को संसद तक निकाले गए मार्च के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। इस प्रदर्शन के दौरान कई प्रदर्शनकारी और सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे। अदालत घायल पुलिसकर्मियों और कथित रूप से हमले का शिकार हुए कुछ पत्रकारों के परिजनों की याचिकाओं पर भी विचार कर रही है।

एसआईटी गठन पर केंद्र ने मांगा और समय

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने की संभावना पर विचार करते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा था। सोमवार की सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया।

प्रदर्शन में शामिल लोगों को लेकर सरकार का दावा

सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में 2,738 ऐसे लोग भी शामिल हुए थे, जिनके खिलाफ हत्या, दुष्कर्म और बच्चों के यौन शोषण जैसे गंभीर मामलों में पहले से मुकदमे दर्ज हैं।

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