नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। इसे धर्म की अधर्म पर और अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान राम ने लंकापति रावण का वध किया था। दशहरा के मौके पर देशभर में रामलीला का आयोजन होता है और प्रदोष काल में रावण के साथ मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों का दहन किया जाता है। इन पुतलों को अहंकार, अन्याय और अधर्म के अंत का प्रतीक माना जाता है। रावण दहन के बाद लोग एक-दूसरे को दशहरा की शुभकामनाएं देते हैं। आइए जानते हैं साल 2026 में दशहरा कब मनाया जाएगा, रावण दहन का शुभ मुहूर्त क्या है और इस पर्व का धार्मिक महत्व क्या है।
कब है दशहरा 2026?
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:50 बजे से शुरू होगी और 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:11 बजे समाप्त होगी।
दशहरा 2026 का शुभ मुहूर्त
विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त की कुल अवधि 45 मिनट है।
अपराह्न पूजा का समय दोपहर 1:14 बजे से 3:30 बजे तक रहेगा। इसकी कुल अवधि 2 घंटे 16 मिनट है।
दशहरा पर बन रहा है शुभ योग
इस साल दशहरा के मौके पर कई शुभ योग बनने की बात कही गई है। इस दिन श्रवण नक्षत्र का भी विशेष संयोग रहेगा। श्रवण नक्षत्र 19 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3:38 बजे से शुरू होगा और 20 अक्टूबर 2026 को शाम 6:02 बजे तक रहेगा।
विजयादशमी का क्या है धार्मिक महत्व?
हिंदू धर्म में विजयादशमी का विशेष महत्व माना गया है। इसे बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में रावण के दस सिरों को व्यक्ति के भीतर मौजूद दस नकारात्मक गुणों का प्रतीक माना गया है।
रावण दहन के जरिए काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार, अभिमान, ईर्ष्या, नफरत, शत्रुता और भय जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से मुक्ति का संदेश दिया जाता है। मान्यता है कि इन नकारात्मकताओं को दूर कर व्यक्ति सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन में आगे बढ़ सकता है।
दशहरा के दिन रावण दहन के अलावा नए कार्य की शुरुआत, व्यापार आरंभ करने और शस्त्र पूजन को भी शुभ माना जाता है।