मध्य पूर्व (West Asia) में जारी सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी वायुसेना ने अपनी सबसे घातक और विनाशकारी युद्ध रणनीति को अंजाम देना शुरू कर दिया है। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के तहत अमेरिका ने अपने ‘स्ट्रैटेजिक बॉम्बर ट्रायड’ (B-1B Lancer, B-2 Spirit और B-52H Stratofortress) को एक साथ युद्ध के मैदान में उतार दिया है।
ईरान के परमाणु ठिकानों, बैलिस्टिक मिसाइल बंकरों और सामरिक कमान केंद्रों पर इन तीनों बॉम्बर्स की सिंक्रोनाइज्ड एयर स्ट्राइक्स ने ईरानी रक्षा प्रणाली (Air Defense) की कमर तोड़कर रख दी है।
1. B-2 स्पिरिट (Stealth Fighter): रडार की नजरों से दूर ‘पहला प्रहार’
दुनिया का सबसे उन्नत स्टेल्थ बॉम्बर B-2 स्पिरिट (B-2A Spirit) इस पूरे ऑपरेशन का मुख्य गेम-चेंजर साबित हो रहा है।
- भूमिका: अपनी फ्लाइंग-विंग डिज़ाइन और स्टेल्थ तकनीक के कारण यह ईरान के S-300 और S-400 जैसे अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम्स की नज़र में आए बिना अंदर घुसने में सक्षम है।
- टारगेट: रात के अंधेरे में किए गए शुरुआती हमलों में इसने तेहरान के कमांड सेंटर, नतांज और फोर्डो स्थित भूमिगत न्यूक्लियर साइट्स को निशाना बनाया।
2. B-1 लैंसर (Supersonic Attacker): गति और सटीक पेनेट्रेशन का कॉम्बिनेशन
‘बोन’ (Bone) के नाम से मशहूर B-1B लैंसर अपनी सुपरसोनिक रफ्तार (लगभग 1,400 किमी/घंटा) और कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता के लिए जाना जाता है।
- भूमिका: वेरिएबल-स्वीप विंग तकनीक के चलते यह दुश्मन के रडार को संभलने का मौका दिए बिना भारी-भरकम पेलोड (34,000 किग्रा तक JDAMS और JASSM मिसाइलें) गिराकर गायब हो जाता है।
- टारगेट: बैलिस्टिक मिसाइल स्टोरेज और रणनीतिक मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर पर रैपिड-रिस्पॉन्स स्ट्राइक्स।
3. B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस (Heavy Lifter): दूर से ही भारी तबाही मचाने वाला योद्धा
1955 से सेवा में मौजूद और 14,200 किमी की कॉम्बैट रेंज वाला B-52H स्ट्रैटोफोर्ट्रेस अमेरिका का सबसे विश्वसनीय और भारी पेलोड (31,500 किग्रा) ले जाने वाला बॉम्बर है।
- भूमिका: यह ईरानी मिसाइल रेंज से बाहर (Stand-off range) रहकर लगातार भारी बमबारी और क्रूज़ मिसाइलों की बौछार कर रहा है।
- टारगेट: खार्ग द्वीप (Kharg Island) के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर, इस्फहान एयर बेस और रसद आपूर्ति लाइनों को ध्वस्त करना।
क्यों निष्प्रभावी साबित हो रही है ईरानी सुरक्षा प्रणाली?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ने इन तीनों बॉम्बर्स को पूरक (Complementary) भूमिकाओं में तैनात किया है:
सामरिक रणनीति: B-2 चुपके से दुश्मन की वायु सुरक्षा को ध्वस्त करता है, B-1 अपनी तेज़ रफ़्तार से महत्वपूर्ण ठिकानों को तबाह करता है, और B-52 लंबी दूरी से लगातार बमबारी करके रसद और आपूर्ति नेटवर्क को नष्ट कर देता है।
इसी त्रिस्तरीय रणनीति (Triad Strategy) की वजह से ईरान के सीजिल-2 (Sejjil-2) मिसाइल ठिकानों और मिसाइल कारखानों को भारी क्षति पहुंची है, जिससे मध्य पूर्व में अमेरिका का हवाई वर्चस्व स्थापित हो गया है।