नीट (NEET) पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्र सरकार के आश्वासनों के बावजूद गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Courts) गठित करने के ऐलान के तुरंत बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार के इस कदम को नाकाफी बताते हुए अपना रुख और कड़ा कर लिया है।
जंतर-मंतर पर सोमवार को हुए संसद मार्च के हिंसक मोड़ लेने के बाद भी CJP और कांग्रेस, दोनों ही अब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।
CJP का पीएम मोदी को सीधा जवाब: ‘इस्तीफा तो देना ही होगा’
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर किए गए ऐलान के बाद CJP ने पीएम के पोस्ट को रीट्वीट करते हुए साफ कर दिया कि वे किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं हैं।
CJP का आधिकारिक रिप्लाई: “धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही होगा।”
गौर करने वाली बात यह है कि अनशन पर बैठे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ने के लिए जवाबदेही तय करने की मांग तो रखी थी, लेकिन उन्होंने सीधे तौर पर शिक्षा मंत्री को पद से हटाने का जिक्र नहीं किया था। इसके बावजूद CJP लगातार इस्तीफे की मांग पर अड़ी हुई है।
राहुल गांधी ने उठाए पीएम मोदी के फैसले पर सवाल, रखीं 3 प्रमुख मांगें
मंगलवार (21 जुलाई) को पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन करने वाले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को पीएम मोदी के फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला।
- राहुल गांधी का आरोप: “आपने हमारे युवाओं को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। आपने हमारी शिक्षा व्यवस्था को तबाह होने दिया और इसके जिम्मेदारों को बचाया।”
कांग्रेस ने सरकार के सामने रखीं 3 नई शर्तें:
- शिक्षा मंत्री को हटाना: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा लिया जाए।
- पीएम मांगे माफी: देश के युवाओं और छात्रों से प्रधानमंत्री सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
- लाठीचार्ज करने वालों पर एक्शन: प्रदर्शनकारी छात्रों पर हमला और लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
सरकार की सफाई: ‘संसद में चर्चा को तैयार, पर विपक्ष बदल रहा मांगें’
एक तरफ जहाँ पीएम मोदी ने आश्वस्त किया है कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, वहीं सरकार का कहना है कि वे संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराने के लिए तैयार हैं। हालांकि, सरकार का आरोप है कि विपक्ष और प्रदर्शनकारी हर दिन नई मांगें जोड़कर गतिरोध को बनाए रखना चाहते हैं।