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Indian Press House > Blog > Trending News > National Flag Day 2026: क्यों बदला गया तिरंगे में चरखा? 22 जुलाई के ऐतिहासिक फैसले की पूरी कहानी
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National Flag Day 2026: क्यों बदला गया तिरंगे में चरखा? 22 जुलाई के ऐतिहासिक फैसले की पूरी कहानी

news desk
Last updated: July 22, 2026 9:37 am
news desk
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आज ही के दिन, 22 जुलाई 1947 को भारत की संविधान सभा ने तिरंगे को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में आधिकारिक मंजूरी दी थी। ठीक इसके 24 दिन बाद देश आजाद हुआ। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा रहे ‘चरखे’ को हटाकर राष्ट्रीय ध्वज के केंद्र में ‘अशोक चक्र’ क्यों रखा गया? नेशनल फ्लैग डे के खास मौके पर जानिए तिरंगे के विकास और इसके पीछे की व्यावहारिक व संवैधानिक कहानी।

Contents
1906 से 1941: मैडम भीकाजी कामा से लेकर पिंगली वेंकैया तक का सफरआजादी की दहलीज पर क्यों बदला गया चरखा?1. गैर-राजनीतिक और समावेशी पहचान2. व्यावहारिक (Printing & Symmetry) चुनौतीअशोक चक्र और 24 तीलियों का गूढ़ अर्थतिरंगे के रंगों का राष्ट्रीय संदेश

1906 से 1941: मैडम भीकाजी कामा से लेकर पिंगली वेंकैया तक का सफर

भारत का वर्तमान तिरंगा एक दिन में अस्तित्व में नहीं आया।

  • 1906: कोलकाता में हरा, पीला और लाल रंग का पहला ध्वज फहराया गया।
  • 1907: मैडम भीकाजी कामा ने जर्मनी में भारतीय स्वतंत्रता का प्रतीक ध्वज फहराया।
  • 1921: पिंगली वेंकैया ने विजयवाड़ा कांग्रेस अधिवेशन में महात्मा गांधी को लाल और हरे रंग का झंडा सौंपा, जिसमें बाद में शांति के प्रतीक के रूप में सफेद रंग और आत्मनिर्भरता के लिए ‘चरखा’ जोड़ा गया।
  • 1931: कांग्रेस ने केसरिया, सफेद और हरे रंग की पट्टियों के बीच नीले चरखे वाला आधिकारिक ध्वज अपनाया।


आजादी की दहलीज पर क्यों बदला गया चरखा?

जब 1947 में भारत की आजादी तय हुई, तब दो मुख्य कारणों से चरखे की जगह सम्राट अशोक के धर्मचक्र (अशोक चक्र) को शामिल किया गया:

1. गैर-राजनीतिक और समावेशी पहचान

चरखा स्वतंत्रता आंदोलन और विशेषकर कांग्रेस पार्टी के झंडे का मुख्य हिस्सा बन चुका था। आजाद भारत को एक ऐसे प्रतीक की जरूरत थी जो किसी एक दल का नहीं, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र, उसकी प्राचीन विरासत और विविध संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करे।

2. व्यावहारिक (Printing & Symmetry) चुनौती

चरखे के डिजाइन में तकली और धागे का संतुलन ऐसा था कि कपड़े के दूसरी तरफ से देखने पर वह उल्टा दिखाई देता था। राष्ट्रीय ध्वज के लिए एक ऐसा चिह्न चाहिए था जो दोनों तरफ से एक जैसा (Symmetrical) दिखे। अशोक चक्र गोल होने के कारण दोनों ओर से बिल्कुल समान दिखता है।

अशोक चक्र और 24 तीलियों का गूढ़ अर्थ

सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ से लिया गया अशोक चक्र (धर्मचक्र) केवल एक आकृति नहीं, बल्कि राष्ट्र संचालन का नैतिक ढांचा है:

  • 24 तीलियां: ये दिन के 24 घंटों और जीवन के 24 नैतिक मूल्यों (जैसे— सत्य, न्याय, साहस, संयम, शांति और करुणा) का प्रतीक हैं।
  • निरंतर गतिशीलता: चक्र यह संदेश देता है कि ठहराव ही पतन है, देश को गरीबी और अशिक्षा से निकलकर लगातार प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ना है।

तिरंगे के रंगों का राष्ट्रीय संदेश

रंगप्रतीक एवं संदेश
केसरिया (Saffron)साहस, त्याग और निस्वार्थ सेवा
सफेद (White)शांति, सत्य और पवित्रता
हरा (Green)समृद्धि, कृषि, उर्वरता और विकास
नीला चक्र (Navy Blue)आकाश और समुद्र की तरह असीम न्याय व कर्तव्य
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TAGGED: 22 July National Flag Day, 24 Spokes in Ashok Chakra Meaning, History of Indian Tricolor, Indian National Flag History, National Flag Day 2026, Pingali Venkayya Flag Design, Why Ashok Chakra replaced Charkha
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