मानसून सत्र के दूसरे दिन संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे और प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर विपक्षी सांसदों ने जमकर नारेबाजी की। हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सदन में उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया जा रहा है और उनका माइक बंद कर दिया गया।
‘देश के हजारों छात्र सड़क पर, सरकार कर रही लाठीचार्ज’ – मल्लिकार्जुन खरगे
सदन के बाहर और भीतर सरकार को घेरते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा:
- छात्रों पर अत्याचार: “देश के हजारों युवा और छात्र लगातार पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार ने उन पर आंसू गैस के गोले दागे, लाठीचार्ज करवाया और उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा।”
- माइक बंद करने का आरोप: खरगे ने कहा, “हम इस गंभीर मुद्दे पर सदन में नियम के तहत चर्चा चाहते थे ताकि गृह मंत्री इस पर जवाब दें। लेकिन जैसे ही मैंने बोलना शुरू किया, मेरा माइक बंद कर दिया गया। क्या यही लोकतंत्र है?”
खरगे का केंद्र पर तीखा हमला: “देश में अराजकता फैला रही सरकार”
विपक्ष के नेता ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार खुद देश में अराजकता का माहौल बना रही है।
मल्लिकार्जुन खरगे का बयान: “अगर संसद जैसी जगह पर भी युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा नहीं होगी, तो फिर हम अपनी बात कहां रखें? सरकार लोगों को उकसा रही है ताकि उन पर लाठियां चलाई जा सकें और उन्हें डराकर जेल में डाला जा सके। देश आज अराजकता की ओर बढ़ रहा है जिसे नियंत्रित करने की मंशा सरकार की नहीं है।”
दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित
- लोकसभा: सुबह कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। स्पीकर के बार-बार आग्रह के बाद भी जब हंगामा शांत नहीं हुआ, तो बैठक स्थगित कर दी गई।
- राज्यसभा: उच्च सदन में भी सभापति के सामने विपक्ष ने पेपर लीक और पुलिस कार्रवाई पर तत्काल चर्चा की मांग रखी। गतिरोध न सुलझने पर सदन को 2 बजे तक के लिए मुल्तवी करना पड़ा।
विपक्ष ने साफ कर दिया है कि जब तक पेपर लीक और छात्रों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर सरकार संसद में विस्तृत चर्चा की अनुमति नहीं देती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।