नई दिल्ली: रिटायरमेंट के बाद जहां ज्यादातर लोग आरामदायक जिंदगी चुनते हैं, वहीं ओडिशा के बालासोर जिले के मुकुलिशी गांव के रहने वाले 61 वर्षीय प्रताप चंद्र राउल ने खेती को अपनी नई पहचान बना लिया। भारतीय सेना और बाद में ओडिशा पुलिस में सेवा देने के बाद उन्होंने गांव की खाली जमीन पर ऑर्गेनिक ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। आज इसी खेती और नर्सरी के जरिए वह सालाना करीब चार लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं।
ऑर्गेनिक ड्रैगन फ्रूट से बना कमाई का मजबूत जरिया
प्रताप चंद्र राउल के पास गांव में 8500 वर्ग फीट जमीन थी, जिस पर उन्होंने ऑर्गेनिक ड्रैगन फ्रूट की खेती और नर्सरी विकसित की। इसी पहल ने उनकी आय का नया रास्ता खोल दिया। वर्ष 1984 में मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह भारतीय सेना में भर्ती हुए। सितंबर 2010 में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने करीब दस साल तक ओडिशा पुलिस में हवलदार के रूप में सेवाएं दीं। वर्ष 2020 में स्वैच्छिक रूप से नौकरी छोड़कर वह अपने गांव लौट आए।
‘शुरू से किसान बनना चाहता था’
एक इंटरव्यू में प्रताप ने बताया कि उनका सपना शुरू से किसान बनने का था। वह ऐसी फसल उगाना चाहते थे, जिसे उनके इलाके के लोगों ने पहले कभी न देखा हो। उनका मानना था कि यदि छोटी जमीन का भी सही तरीके से उपयोग किया जाए तो उससे अच्छी कमाई की जा सकती है। इसी सोच के साथ उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती का फैसला लिया।
खेती सीखने के लिए सोशल मीडिया का लिया सहारा
खेती का कोई अनुभव नहीं होने के कारण उन्होंने पहले इसकी पूरी जानकारी जुटाई। यूट्यूब और फेसबुक पर वीडियो देखकर उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती के तरीके सीखे। साथ ही कई अनुभवी किसानों से बातचीत कर अपनी जमीन और मौसम के अनुसार उपयुक्त फसल का चयन किया।
कम पानी और लंबी पैदावार ने बनाया ड्रैगन फ्रूट पहली पसंद
कई विकल्पों पर विचार करने के बाद उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती चुनी। उनके मुताबिक इस फसल की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है, इसे अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है, गर्म मौसम में इसकी अच्छी पैदावार होती है और एक बार पौधे लगाने के बाद करीब 25 वर्षों तक फल मिलते रहते हैं। इन्हीं कारणों से उन्होंने इस खेती में निवेश करने का निर्णय लिया।
1.3 लाख रुपये के निवेश से शुरू किया सफर
मार्च 2022 में उन्होंने करीब 1.3 लाख रुपये निवेश कर ड्रैगन फ्रूट फार्म की शुरुआत की। इस राशि से उन्होंने एक हजार पौधे, करीब 70 कंक्रीट के खंभे, 900 फीट जीआई पाइप और अन्य जरूरी ढांचा तैयार किया। उन्होंने गुजरात से वियतनाम रेड, थाई जंबो, मोरक्कन रेड, हाइब्रिड जायंट रेड, इजराइली येलो, ताइवान पिंक और व्हाइट ड्रैगन फ्रूट समेत सात प्रीमियम किस्मों के पौधे मंगाए।
पहली फसल ने किया निराश, लेकिन नहीं मानी हार
मार्च 2023 में पहली फसल तैयार हुई, लेकिन उत्पादन केवल करीब 50 किलोग्राम रहा और फल भी अपेक्षा से छोटे निकले। हालांकि प्रताप ने इसे असफलता नहीं बल्कि सीख का अवसर माना। उन्होंने ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल कर पौधों की गुणवत्ता बेहतर बनाई, जिसका असर अगले सीजन में साफ दिखाई दिया।
2024 के बाद तेजी से बढ़ी आय
वर्ष 2024 में उनकी मेहनत रंग लाई और उत्पादन बढ़कर 200 किलोग्राम पहुंच गया, जिससे करीब 50 हजार रुपये की आय हुई। अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच उत्पादन लगभग 900 किलोग्राम तक पहुंच गया। इसमें से करीब 650 किलोग्राम ड्रैगन फ्रूट उन्होंने ग्राहकों को लगभग 200 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचा, जबकि बाकी फल थोक व्यापारियों ने खरीदे। फलों की बिक्री से उनकी आय करीब 1.4 लाख रुपये रही। प्रताप का कहना है कि इस साल अब तक वह 1.40 लाख रुपये कमा चुके हैं और उन्हें उम्मीद है कि नवंबर तक उनकी वार्षिक कमाई तीन लाख रुपये तक पहुंच जाएगी। वहीं खेती और नर्सरी के जरिए उनकी कुल सालाना आय करीब चार लाख रुपये हो रही है।