नई दिल्ली: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की ओर बढ़े हजारों प्रदर्शनकारियों के बीच केंद्र सरकार ने पहली बार बातचीत की पहल की। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उनकी मांगें सुनीं। हालांकि सरकार की ओर से किसी भी मांग पर तत्काल सहमति या आश्वासन नहीं दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में सरकार की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
संसद मार्च के बीच सरकार ने खोला बातचीत का रास्ता
करीब तीन सप्ताह से जारी प्रदर्शन के बाद सोमवार को जेपी नड्डा ने सीजेपी के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च कर रहे थे। सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के मुताबिक प्रदर्शनकारियों की बात सुनी गई, लेकिन उनकी मांगों पर कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई गई।
संसद भवन में हुई मंत्रियों की अहम बैठक
संसद भवन में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अन्य मंत्रियों के साथ बैठक के बाद सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि जेपी नड्डा की मुलाकात का उद्देश्य केवल प्रदर्शनकारियों का पक्ष सुनना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने किसी भी मांग पर विचार करने का कोई वादा नहीं किया है।
सरकार ने क्यों बदली रणनीति?
सूत्रों के अनुसार, मानसून सत्र के पहले दिन हालात बिगड़ने और तनाव बढ़ने के बाद सरकार ने प्रदर्शनकारियों से संवाद का फैसला किया। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि सरकार खुद को छात्रों के प्रति असंवेदनशील दिखने से बचाना चाहती थी, इसलिए बातचीत का रास्ता चुना गया।
‘असली छात्र लौट चुके हैं’, सरकार का दावा
सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने दावा किया कि वास्तविक छात्र अब अपना प्रदर्शन समाप्त कर पढ़ाई में लौट चुके हैं और परीक्षा परिणाम भी जारी हो चुके हैं। उनके मुताबिक अब प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोग इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं और आंदोलन को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
जेपी नड्डा ने क्या कहा?
जेपी नड्डा ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से पहली बार सरकार से बातचीत का प्रस्ताव आया था। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत चर्चा हुई और उनकी लिखित मांगें भी प्राप्त हुईं। साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त कर सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन का सहयोग करने की अपील की।
सीजेपी ने दोहराई अपनी मांगें
सीजेपी के प्रतिनिधियों ने मुलाकात के दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत अपनी सभी मांगें सरकार के सामने रखीं। संगठन का कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रतिनिधियों के अनुसार उन्हें केवल इतना भरोसा मिला कि उनकी मांगों पर उचित स्तर पर चर्चा की जाएगी, लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया।
ये हैं सीजेपी की प्रमुख मांगें
सीजेपी ने सोनम वांगचुक को रिहा करने और उनकी आवाजाही पर लगी रोक हटाने की मांग की है। इसके अलावा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या बर्खास्तगी, तथा कथित पेपर लीक से जुड़े आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग भी संगठन ने दोहराई है।
सरकार का रुख फिलहाल कायम
सरकारी सूत्रों का कहना है कि इन मांगों पर तत्काल कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। हालांकि एक वरिष्ठ नेता ने संकेत दिया कि आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजे के मुद्दे पर सरकार विचार कर सकती है। वहीं एक अन्य मंत्री ने कहा कि पार्टी, सरकार और अधिकारियों के बीच आगे इस विषय पर चर्चा जारी रहेगी।