- बड़ी कूटनीतिक जीत: कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच 14-पॉइंट के समझौते पर सहमति।
- प्रतिबंधों में भारी राहत: ईरानी तेल-पेट्रोकेमिकल एक्सपोर्ट से पाबंदी हटी, जब्त संपत्तियां होंगी फ्री।
- शांति का ब्लूप्रिंट: लेबनान युद्ध रोकने और परमाणु कार्यक्रम की निगरानी के लिए गठित किए गए 4 विशेष वर्किंग ग्रुप।
जेनेवा (स्विट्जरलैंड)। तमाम गतिरोधों और शुरुआती तनाव के बाद स्विट्जरलैंड में आयोजित ‘लेक लूसर्न समिट’ से मिडिल ईस्ट (Middle East) शांति वार्ता को लेकर बेहद बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की बातचीत रविवार (21 जून) को सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। दोनों महाशक्तियों के बीच ऐतिहासिक 14-सूत्रीय (14-Point) समझौते पर सहमति बन गई है, जिसे ईरानी विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच की ‘पहली असली परीक्षा’ करार दिया है।
बैठक के बाद मुख्य मध्यस्थ कतर और पाकिस्तान ने एक साझा बयान जारी कर इस महा-समझौते को जमीन पर उतारने के लिए चार उच्च स्तरीय कमेटियों के गठन का ऐलान किया है।
अराघची का बड़ा खुलासा: “हटी अमेरिकी नाकेबंदी, शुरू होगा तेल का निर्यात”
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोमवार (22 जून) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इस ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता की पुष्टि की। अराघची ने बताया कि पाकिस्तान और कतर की अथक कोशिशों के कारण इन अहम मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहमति बन गई है:
- आर्थिक प्रतिबंधों में ढील: ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल एक्सपोर्ट पर से अमेरिकी पाबंदी हटा दी गई है।
- पोर्ट से हटी नाकेबंदी: ईरानी बंदरगाहों (Ports) की अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई नाकेबंदी अब पूरी तरह खत्म होगी।
- जब्त फंड्स होंगे रिहा: विदेशों में फ्रीज की गई ईरान की संपत्तियों को जारी करने का रास्ता साफ हो गया है।
- मास्टर प्लान: ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बड़ी पुनर्निर्माण और विकास योजना (Development Plan) पर भी मुहर लगी है।
लेक लूसर्न समिट: समझौते को लागू करेंगी ये 4 ताकतवर कमेटियां
वार्ता को पूरी तरह पारदर्शी और प्रभावी बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों ने 4 विशेष कमेटियों के गठन को मंजूरी दी है:
| कमेटी / ग्रुप का नाम | मुख्य कार्य और जिम्मेदारी |
| 1. हाई लेवल कमेटी (High Level Committee) | इसका स्वरूप पूरी तरह राजनीतिक होगा। यह पूरी वार्ता पर नजर रखेगी और मुख्य वार्ताकार इसे ही रिपोर्ट करेंगे। |
| 2. लीड वर्किंग ग्रुप्स (Lead Working Groups) | यह ग्रुप ईरान के परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) और आर्थिक प्रतिबंधों जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर अलग-अलग काम करेगा। |
| 3. मॉनिटरिंग एंड डिसप्यूट रेजोलेशन ग्रुप | इसका काम यह सुनिश्चित करना होगा कि दोनों देश आपसी समझौते (MoU) के नियमों का सही से पालन कर रहे हैं या नहीं। |
| 4. डि-कॉन्फिलेक्शन सेल (De-confliction Cell) | इस सेल का मुख्य फोकस लेबनान में जारी युद्ध को पूरी तरह रुकवाने और वहां शांति बहाल करने पर होगा। |
लेबनान युद्ध विराम की ओर बढ़े कदम
ईरानी विदेश मंत्री ने साफ किया कि इस बातचीत के बाद लेबनान में जारी जंग को रोकने की दिशा में बहुत अच्छी और ठोस प्रगति हुई है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि जहां एक तरफ दोनों देशों के बीच बयानों की तल्खी देखने को मिल रही थी, वहीं बैकचैनल डिप्लोमेसी के जरिए कमेटियों का यह गठन और प्रतिबंधों में छूट मिलना इस बात का संकेत है कि दोनों देश युद्ध टालने के लिए गंभीर हैं।