लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्रमुख राजस्व देने वाले सरकारी विभागों में टैक्स, फीस और ब्याज वसूली में भारी लापरवाही का मामला सामने आया है।
नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, स्टांप-रजिस्ट्रेशन, आबकारी (Excise) और परिवहन (Transport) विभाग की सुस्ती के कारण राज्य के खजाने को 26.90 करोड़ रुपये का सीधा वित्तीय नुकसान हुआ है।
कैग की रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि 31 मार्च 2023 तक राज्य सरकार का विभिन्न करों के रूप में 36,241.90 करोड़ रुपये का राजस्व बकाया था, जिसमें से 15,293.15 करोड़ रुपये की राशि पिछले 5 वर्षों से अधिक समय से लंबित पड़ी हुई है।
स्टांप और रजिस्ट्रेशन: गलत मूल्यांकन से ₹6.83 करोड़ का नुकसान
CAG रिपोर्ट के मुताबिक, जमीन की रजिस्ट्री के दौरान जमा दस्तावेजों की अधिकारियों ने ठीक से जांच नहीं की।
- कमियों को नजरअंदाज किया गया: संपत्तियों का सही मूल्यांकन न होने के कारण निर्धारित स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस से कम वसूली की गई।
- वित्तीय प्रभाव: इस ढिलाई की वजह से अकेले स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के माध्यम से सरकार को 6.83 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का नुकसान झेलना पड़ा।
ट्रांसपोर्ट विभाग: बिना फिटनेस दौड़ती रहीं गाड़ियां, छूटी परमिट फीस
परिवहन विभाग में अधिकारियों द्वारा नोटिस न जारी करने और ढीली वसूली के कारण कई वित्तीय चूके सामने आईं:
- बिना फिटनेस रिन्यूअल चल रहे वाहन: 2,010 कमर्शियल और 1,537 नॉन-कमर्शियल वाहन बिना फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यू कराए सड़कों पर चलते रहे। अधिकारियों द्वारा कार्रवाई न करने से 37.18 लाख रुपये की फिटनेस फीस वसूली से छूट गई।
- परमिट फीस का नुकसान: परमिट की समयसीमा खत्म होने के बाद भी कोई कड़ा कदम नहीं उठाया गया, जिससे 96.38 लाख रुपये की आवेदन व परमिट फीस खजाने में जमा नहीं हो सकी।
- बसों पर टैक्स व पेनाल्टी छूटी: तय शहरी सीमा से बाहर संचालित 84 JNNURM बसों पर अतिरिक्त टैक्स न लगाने से 1.38 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, UPSRTC (रोडवेज) की बसों के 6,907 मामलों में देरी से टैक्स जमा करने पर नियमानुसार पेनाल्टी तक नहीं वसूली गई।
आबकारी विभाग: शराब फैक्ट्रियों पर ब्याज माफ करने जैसी चूक
आबकारी विभाग की जांच में सामने आया कि राज्य की 8 शराब डिस्टिलरी (Distilleries) ने आबकारी शुल्क (Excise Duty) का भुगतान निर्धारित समय के बाद किया।
- नियमों के तहत देरी से भुगतान पर ब्याज वसूला जाना अनिवार्य था।
- लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण शराब फैक्ट्रियों से ब्याज नहीं वसूला गया, जिससे सरकार को करीब 2 करोड़ रुपये का चपत लगी।
रिकवरी सिस्टम पर CAG ने उठाए गंभीर सवाल
कैग ने न सिर्फ तात्कालिक चूकों को उजागर किया, बल्कि पूरे वसूली तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं:
- धीमी कार्रवाई: वर्ष 2023-24 के दौरान 162 यूनिट्स से जुड़े 1,40,892 मामलों में 1,906.75 करोड़ रुपये की गड़बड़ी उजागर कर विभागों को भेजी गई थी। हालांकि, अप्रैल 2023 से नवंबर 2024 के बीच विभागों ने केवल 84 मामलों में महज 1.49 करोड़ रुपये की ही वसूली स्वीकार की।
- बकाया वसूली का सुझाव: कैग ने बार-बार ध्यान दिलाने के बावजूद विभागों की सुस्त कार्यप्रणाली पर चिंता जताई है। रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि बकाया राजस्व की वसूली के लिए सख्त, समयबद्ध और जवाबदेह सिस्टम लागू किया जाए।