अहमदाबाद: स्पेशलिटी केमिकल्स कंपनी किरी इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने हाल ही में 11 साल पुराने डायस्टार विवाद को खत्म करते हुए अपनी 37.57% हिस्सेदारी बेचकर 689 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 6200 करोड़ रुपये) हासिल किए हैं। नेट प्रोसीड्स के रूप में कंपनी को 5200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली है, जो इसकी मौजूदा मार्केट कैपिटलाइजेशन (लगभग 3048 करोड़ रुपये) से काफी ज्यादा है। लेकिन इस बड़ी कैश इनफ्लो के बावजूद, कंपनी के शेयरों में लगातार गिरावट देखी जा रही है। 1 जनवरी 2026 को शेयर का भाव 779 रुपये पर था, जो 9 जनवरी तक 506 रुपये तक लुढ़क गया। आखिर इस गिरावट के पीछे क्या कारण हैं? आइए विस्तार से समझते हैं।
डायस्टार विवाद का बैकग्राउंड
किरी इंडस्ट्रीज ने 2010 में जर्मन कंपनी डायस्टार में हिस्सेदारी खरीदी थी, लेकिन जल्द ही यह निवेश विवादों में घिर गया। कंपनी ने सिंगापुर इंटरनेशनल कमर्शियल कोर्ट में केस दायर किया, जहां लंबी कानूनी लड़ाई चली। विवाद मुख्य रूप से डायस्टार की मैनेजमेंट और वैल्यूएशन से जुड़ा था, जिसमें किरी इंडस्ट्रीज ने दावा किया कि उसे उचित मूल्य नहीं मिल रहा। यह केस 11 साल तक चला और आखिरकार दिसंबर 2025 में सेटलमेंट हुआ, जब चीनी कंपनी झेजियांग लॉन्गशेंग ग्रुप ने किरी की पूरी हिस्सेदारी 689 मिलियन डॉलर में खरीद ली।
इस सेटलमेंट से कंपनी को 6200 करोड़ रुपये की कुल राशि मिली, जिसमें से टैक्स और अन्य खर्च कटने के बाद नेट 5200 करोड़ रुपये से ज्यादा बचते हैं। कंपनी के चेयरमैन और एमडी मनीष किरी ने कहा कि यह राशि कंपनी की ग्रोथ के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। कंपनी अब डेट-फ्री होने की राह पर है और फंड्स का बड़ा हिस्सा नए बिजनेस में लगाने की योजना बना रही है।
कैश इनफ्लो के बावजूद शेयरों में गिरावट क्यों?
इस बड़ी कैश राशि के ऐलान के बाद निवेशकों की उम्मीद थी कि शेयरों में तेजी आएगी, लेकिन उलटा हुआ। 1 जनवरी को 779 रुपये पर ट्रेडिंग कर रहे शेयर 9 जनवरी तक 506 रुपये तक गिर गए, यानी लगभग 35% की गिरावट। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसके पीछे कई कारण हैं:
- ऑपरेशनल लॉसेस और फाइनेंशियल हेल्थ में गिरावट: कंपनी की हालिया तिमाही रिपोर्ट्स में नेट लॉस बढ़ा है। मार्च क्वार्टर में कंपनी को 84.6 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि रेवेन्यू 6.5% घटकर 205 करोड़ रुपये रह गया। डायस्टार सेटलमेंट से पहले कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति कमजोर थी, और निवेशक मानते हैं कि कैश इनफ्लो से तत्काल ऑपरेशनल सुधार नहीं होगा।
- नए इन्वेस्टमेंट्स में अनिश्चितता: कंपनी ने ऐलान किया है कि 90% से ज्यादा फंड्स (लगभग 4680 करोड़ रुपये) नए सेक्टर्स जैसे फर्टिलाइजर्स और मेटल्स (खासकर कॉपर) में लगाए जाएंगे, जो इंपोर्ट सब्स्टीट्यूशन पर फोकस करेंगे। ये निवेश भारत में किए जाएंगे और 30% से ज्यादा IRR देने की उम्मीद है, लेकिन निवेशकों को लगता है कि ये नए क्षेत्र कंपनी की कोर एक्सपर्टीज (डाईज और स्पेशलिटी केमिकल्स) से अलग हैं। इससे रिस्क बढ़ जाता है, और मार्केट ने इसे नेगेटिव तरीके से लिया।
- मार्केट प्रेशर और वोलेटिलिटी: 2 जनवरी 2026 को शेयरों में 10% की गिरावट आई, जो इंट्राडे लो तक पहुंच गया। ब्रॉडर मार्केट पॉजिटिव होने के बावजूद, कंपनी पर प्राइस प्रेशर बना रहा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सेटलमेंट की खबर पहले ही प्राइस इन हो चुकी थी, और अब फोकस कंपनी की करंट परफॉर्मेंस पर है।
- डिविडेंड की कम उम्मीद: कंपनी ने कहा कि 10% से कम फंड्स स्पेशल डिविडेंड के लिए इस्तेमाल होंगे, जो निवेशकों की उम्मीदों से कम है। इससे शॉर्ट-टर्म रिटर्न की आशा कम हुई।
कंपनी की आगे की योजनाएं
किरी इंडस्ट्रीज अब डेट-फ्री होने पर फोकस कर रही है, जो पहले से शेड्यूल से पहले हो सकता है। नए निवेशों से कंपनी डायवर्सिफाई करना चाहती है, और पेबैक पीरियड 3-4 साल का अनुमान है। चेयरमैन मनीष किरी ने कहा, “यह फंड्स कंपनी को नए ऊंचाइयों पर ले जाएंगे, लेकिन हमें स्ट्रैटेजिक तरीके से आगे बढ़ना होगा।”
किरी इंडस्ट्रीज के लिए डायस्टार सेटलमेंट एक बड़ी जीत है, लेकिन शेयरों की गिरावट बताती है कि मार्केट सिर्फ कैश पर नहीं, बल्कि सस्टेनेबल ग्रोथ पर फोकस करता है। अगर कंपनी नए निवेशों से अच्छा परफॉर्म करती है, तो शेयर रिकवर कर सकते हैं। निवेशकों को सलाह है कि कंपनी की Q4 रिजल्ट्स और इन्वेस्टमेंट अपडेट्स पर नजर रखें। मौजूदा मार्केट कैप 3048 करोड़ रुपये होने से कंपनी अंडरवैल्यूड लग रही है, लेकिन रिस्क फैक्टर्स को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।