Uncategorized

2 साल में 15 बार राहत: आखिर Asaram को बार-बार बेल कैसे मिली?

भारत की न्याय व्यवस्था में एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सवाल सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस सिस्टम का है जिस पर करोड़ों लोग भरोसा करते हैं। चर्चा का केंद्र हैं Asaram, जिन्हें 2018 में नाबालिग से रेप मामले में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी।लेकिन पिछले दो वर्षों में जिस तरह उन्हें लगातार मेडिकल आधार पर बेल, पैरोल और राहत मिलती रही, उसने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक बहस छेड़ दी है।

2024 से 2026 तक लगातार राहत

मार्च 2024 से लेकर अप्रैल 2026 तक अलग-अलग अदालतों और प्रशासनिक आदेशों के जरिए Asaram को करीब 15 बार राहत मिली। इनमें मेडिकल बेल, पैरोल विस्तार और इलाज के लिए अनुमति जैसी राहतें शामिल रहीं।

21 मार्च 2024 को उन्हें इलाज के लिए जोधपुर स्थित आरोग्यम सेंटर जाने की अनुमति मिली। इसके बाद अप्रैल, जुलाई और अगस्त 2024 में भी मेडिकल आधार पर राहत दी गई। नवंबर 2024 में अदालत ने उन्हें उचित अवधि तक आरोग्यम में रहने की अनुमति दी।

2025 में यह सिलसिला और तेज़ दिखाई दिया। जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अगस्त में लगातार राहत और विस्तार दिए गए। आलोचकों का कहना है कि यह सिर्फ एक-दो बार की मानवीय राहत नहीं, बल्कि एक पैटर्न जैसा दिखाई देता है।

जनता के मन में उठते सवाल

कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी कैदी की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर हो, तो अदालतें मानवीय आधार पर राहत दे सकती हैं। यह पूरी तरह न्यायिक अधिकार के दायरे में आता है।

लेकिन आम जनता का सवाल इससे अलग है। क्या देश की जेलों में बंद हजारों बुजुर्ग और बीमार कैदियों को भी इतनी ही तेजी और आसानी से राहत मिलती है? क्या एक गरीब या साधारण कैदी को भी बार-बार मेडिकल आधार पर बेल मिल पाती है?

यही कारण है कि सोशल मीडिया पर VIP Justiceऔर Equal Law जैसे मुद्दे लगातार ट्रेंड कर रहे हैं।

मीडिया की चुप्पी पर भी सवाल

कई लोग यह भी पूछ रहे हैं कि देश का mainstream media इस मुद्दे पर उतना आक्रामक क्यों नहीं दिखता, जितना दूसरे मामलों में दिखाई देता है। आलोचकों का कहना है कि बड़े और प्रभावशाली नामों के मामलों में अक्सर बहस का स्वर बदल जाता है।

हालांकि यह भी सच है कि अदालतों के फैसले संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होते हैं और किसी भी राहत को कानूनी दायरे में ही मंजूरी दी जाती है।

फिर भी लोकतंत्र में सवाल पूछना जनता का अधिकार है और फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है
क्या भारत में कानून सचमुच सबके लिए बराबर है, या प्रभावशाली लोगों के लिए रास्ते अपेक्षाकृत आसान हो जाते हैं?

news desk

Recent Posts

12 साल बाद जेनिफर विंगेट ने रचाई दूसरी शादी!  टेलर स्विफ्ट के गाने पर शेयर की ड्रीमी वेडिंग रील

टेलीविजन इंडस्ट्री की सबसे पॉपुलर एक्ट्रेसेस  जेनिफर विंगेट “Jennifer Winget” ने अपनी पर्सनल लाइफ को…

6 hours ago

तमिलनाडु में ‘स्टालिन-विजय’ की जुगलबंदी! परिसीमन के मुद्दे पर DMK और TVK ने मिलाया हाथ

संसद के मॉनसून सत्र के शुरू होने से पहले दक्षिण भारत के सियासी मैदान में…

6 hours ago

अहमदाबाद पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट से 8 की मौत, रिहायशी इलाकों के करीब बारूद के ढेरों पर उठते गंभीर सवाल

गुजरात के अहमदाबाद से एक बेहद दुखद और दहला देने वाली खबर सामने आई है।…

6 hours ago

सोनम वांगचुक के अनशन पर राहुल गांधी का बड़ा हमला, बोले– ‘असत्य और हिंसा पर टिकी है मोदी सरकार’

जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेकर सियासी पारा चढ़…

6 hours ago

अचानक डाउन हुआ X! फीड फ्रीज, पोस्ट गायब और ‘थंब्स डाउन’ के चक्कर में उलझे दुनिया भर के यूजर्स

एलन मस्क का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X शनिवार को एक बड़े ग्लोबल आउटेज का शिकार…

7 hours ago

नेवी ब्लू बनारसी साड़ी पहन काशी विश्वनाथ के दरबार पहुंचीं अक्षरा सिंह, तस्वीरें शेयर कर लिखा दिल छूने वाला संदेश

भोजपुरी सिनेमा की सेंसेशन और 'क्वीन' अक्षरा सिंह इन दिनों भक्ति के रंग में डूबी…

8 hours ago