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स्वास्थ्य विभाग के ऑडिट पर सवाल, कर्मचारियों ने की निष्पक्ष जांच की मांग

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार जहां वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए लगातार नए निर्देश जारी कर रही है, वहीं स्वास्थ्य विभाग के भीतर कार्यरत संप्रेक्षा (ऑडिट) तंत्र स्वयं गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है।

आजमगढ़ में स्वास्थ्य विभाग के ऑडिट को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तृतीय श्रेणी कर्मचारियों ने ऑडिट प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए हाल ही में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) और मुख्य राजस्व अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की ।

कर्मचारियों का आरोप है कि ऑडिट प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई और वित्तीय गड़बड़ियों पर पर्दा डालने का प्रयास किया गया। ज्ञापन देने वालों में उमेश कुशवाहा, संजीव कुमार सिंह, रमेश बाबू, आलोक कुमार यादव और अमित कुमार यादव शामिल रहे।

बताया गया कि 18 मई को वरिष्ठ सम्प्रेक्षक कपिलदेव द्वारा पत्र जारी कर 19 मई से ऑडिट शुरू करने की सूचना दी गई थी। इसके बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने 19 और 20 मई को सभी सीएचसी और पीएचसी को ऑडिट के लिए बुलाया।

कर्मचारियों का कहना है कि ऑडिट टीम ने केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी कीं और 21 मई को दोपहर से पहले ही होटल से चेक आउट कर वापस लौट गई, जबकि ऑडिट 18 से 23 मई तक निर्धारित था। उनका दावा है कि 22 ब्लॉकों के अंतर्गत आने वाले 40 से 50 सीएचसी/पीएचसी और दो संयुक्त चिकित्सालयों का ऑडिट इतने कम समय में संभव नहीं है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऑडिट के दौरान गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और रिकॉर्ड की गहन जांच नहीं की गई। करोड़ों रुपये की सीएमएसडी क्रय सामग्री के ऑडिट की भी अनदेखी की गई।

कर्मचारियों ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए और मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सीएमएस समेत संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच हो। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सीएमएस और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच हो, ताकि संभावित वित्तीय गड़बड़ियों का खुलासा हो सके।

news desk

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