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कर्नाटक में ‘DK युग’ का आगाज़! लेकिन सरकार की डोर सिद्धारमैया के हाथों में? जाने नई कैबिनेट का पूरा समीकरण

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार “DK Shivakumar” कुछ ही देर में बेंगलुरु के विधानसभा भवन में राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। कांग्रेस आलाकमान की आपसी सहमति के फॉर्मूले के तहत हुए इस शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण को बेहद गरिमापूर्ण तरीके से अंजाम दिया गया। साथ ही इस नए राजनीतिक समीकरण में दलित समुदाय के वरिष्ठ नेता “जी. परमेश्वर”. उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालेंगे।

शपथ ग्रहण और बेंगलुरु का सियासी पारा

शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले राजधानी बेंगलुरु का सियासी तापमान बेहद हाई रहा। इस आयोजन को कांग्रेस ने एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में पेश किया और इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत ‘इंडिया’ गठबंधन के कई शीर्ष नेता बेंगलुरु पहुंचे।

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से ठीक पहले डीके शिवकुमार ने भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा से मुलाकात की। राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात को राज्य के विकास के लिए एक सकारात्मक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। कनकपुरा से लेकर बेंगलुरु तक सड़कों पर डीके शिवकुमार के बड़े-बड़े कटआउट्स लगाए गए और समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ इस बदलाव का जश्न मनाया।

क्षेत्रीय संतुलन का ‘फोर-वे बैलेंस’

पार्टी आलाकमान के साथ चली लंबी मैराथन बैठकों के बाद मंत्रियों की पहली सूची को अंतिम रूप दिया गया। आज मुख्यमंत्री के साथ 13 से 14 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई, जबकि पूरी कैबिनेट का विस्तार आने वाले दिनों में होगा। इस शुरुआती कैबिनेट में क्षेत्रीय, जातीय और गुटीय संतुलन साधने की पूरी कोशिश की गई है:

प्रमुख चेहरे और विभाग

एच.के. पाटिल: कानून, संसदीय कार्य और पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी मिल सकती है।

सतीश जारकीहोली: वरिष्ठ मंत्री के रूप में उत्तर कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करेंगे

प्रियंक खरगे: ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय का कार्यभार संभालेंगे

दिनेश गुंडू राव: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

लक्ष्मी आर. हेब्बालकर: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय

यतींद्र सिद्धारमैया: पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे यतींद्र को मेडिकल या किसी अन्य महत्वपूर्ण विभाग के साथ कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा

ए.एस. पोंनन्ना: कानूनी और प्रशासनिक मामलों के विशेषज्ञ के रूप में नई भूमिका में दिखेंगे

मंत्रिमंडल में बना रहेगा सिद्धारमैया का ‘दखल’

राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, भले ही सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया हो, लेकिन नई सरकार और मंत्रिमंडल के कामकाज में उनका दखल और प्रभाव पूरी तरह बरकरार रहेगा।

सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है,आलाकमान के फॉर्मूले के तहत, कैबिनेट के विस्तार, विभागों के बंटवारे और सरकार की प्रमुख नीतियों में सिद्धारमैया की सहमति और उनका मार्गदर्शन अनिवार्य होगा। उनके खेमे के मंत्रियों को कैबिनेट में अहम विभाग मिलना और उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया का मंत्री बनना इस बात का साफ संकेत है कि सरकार चलाने में सिद्धारमैया की भूमिका को दरकिनार नहीं किया जा सकता।

news desk

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