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ईरान-अमेरिका वार्ता: सीजफायर के बाद भी बढ़ा टकराव, दोनों देशों ने एक-दूसरे के सामने रखीं 5 कड़ी शर्तें

news desk
Last updated: May 18, 2026 10:04 am
news desk
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तेहरान/वाशिंगट।मध्य पूर्व (Middle East) में युद्धविराम लागू होने के बाद भी ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक रस्साकशी जारी है। दोनों देश एक बार फिर शांति की मेज पर आने की कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन पृष्ठभूमि में दोनों पक्षों ने ऐसी सख्त शर्तें रख दी हैं, जिससे बातचीत की राह आसान नजर नहीं आ रही। ईरान की ‘फर्स न्यूज एजेंसी’ के हवाले से सामने आई खबरों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान दोनों ने ही एक-दूसरे के सामने 5-5 बड़ी मांगें रखी हैं।

Contents
अमेरिका की 5 बड़ी मांगें (US Conditions for Talks)ईरान का पलटवार: ये हैं तेहरान की 5 शर्तें (Iran’s Counter-Demands)पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, तो बड़ा सैन्य एक्शन लिया जा सकता है। वहीं, ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी भी नए हमले का पहले से ज्यादा आक्रामक जवाब दिया जाएगा।

अमेरिका की 5 बड़ी मांगें (US Conditions for Talks)

अमेरिकी प्रशासन ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान तक जो नया प्रस्ताव भिजवाया है, उसमें मुख्य रूप से परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने की बात कही गई है:

  • यूरेनियम सौंपने की शर्त: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने पास सुरक्षित रखा हुआ लगभग 400 किलोग्राम हाई-एनरिच्ड (उच्च संवर्धित) यूरेनियम उसे सौंप दे।
  • परमाणु केंद्रों पर पाबंदी: ईरान को देश में केवल एक न्यूक्लियर फैसिलिटी (परमाणु केंद्र) चालू रखने की अनुमति होगी, बाकी सभी पर रोक लगानी होगी।
  • कोई मुआवजा नहीं: अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह युद्ध के कारण हुए किसी भी नुकसान की भरपाई या मुआवजा ईरान को नहीं देगा।
  • फंड्स पर रोक: विदेशों में फ्रीज (जमा) पड़ी ईरान की कुल संपत्ति का केवल 25 फीसदी से कम हिस्सा ही जारी किया जाएगा, पूरी रकम नहीं।
  • सैन्य गतिविधि पर नियंत्रण: शांति वार्ता के दौरान क्षेत्र में सैन्य हलचलें कम करनी होंगी, आगे का रुख बातचीत की कामयाबी पर निर्भर करेगा।

ईरान का पलटवार: ये हैं तेहरान की 5 शर्तें (Iran’s Counter-Demands)

वाशिंगटन के इस कड़े रुख के जवाब में ईरान ने भी अपनी शर्तों की फेहरिस्त सौंप दी है:

  • क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई पर रोक: ईरान का कहना है कि जब तक पूरे क्षेत्र, विशेषकर लेबनान में सैन्य ऑपरेशन पूरी तरह बंद नहीं होते, वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी।
  • प्रतिबंधों की समाप्ति: अमेरिका को ईरान पर लगाए गए सभी आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध पूरी तरह हटाने होंगे।
  • फंड की पूरी वापसी: विदेशों में रोकी गई ईरान की पूरी धनराशि को बिना किसी शर्त के तुरंत रिलीज करना होगा।
  • युद्ध का हर्जाना: ईरान ने अमेरिका से युद्ध में हुए नुकसान के मुआवजे (हर्जाने) की मांग की है।
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान के संप्रभु अधिकारों को वैश्विक मान्यता दी जाए।

पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका

इस पूरे कूटनीतिक विवाद में पड़ोसी देश पाकिस्तान दोनों महाशक्तियों के बीच ‘ब्रिज’ (मध्यस्थ) का काम कर रहा है। अमेरिकी प्रस्ताव और ईरान का जवाब, दोनों का आदान-प्रदान पाकिस्तानी राजनयिकों के जरिए ही हुआ है।

ईरानी विदेश मंत्रालय का बयान:

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने अमेरिका और इजरायल को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि क्षेत्र में अस्थिरता और शांति प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने के लिए यही दोनों देश जिम्मेदार हैं। हालांकि, अभी तक न तो वाशिंगटन और न ही तेहरान ने आधिकारिक तौर पर इन शर्तों की सार्वजनिक पुष्टि की है।

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TAGGED: अमेरिका, आर्थिक प्रतिबंध, ईरान, डोनाल्ड ट्रंप, परमाणु समझौता, पाकिस्तान मध्यस्थता, फर्स न्यूज एजेंसी, मिडिल ईस्ट संकट, युद्धविराम, यूरेनियम संवर्धन, लेबनान, शांति वार्ता, सीजफायर, होर्मुज स्ट्रेट
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